Monday, September 6, 2021

बीजेपी बनी सबसे अधिक चंदा लेने वाली पार्टी

अनिल कुमार।।

नई दिल्ली।। ट्रस्टों से सबसे ज्यादा चंदा 111.35 करोड़ बीजेपी को मिला है, कांग्रेस को 31.65 करोड़ फिर एनसीपी को 6.78 करोड़, बीजू जनता दल को 5.25 करोड़, आम आदमी पार्टी को 3 करोड़, इंडियन लोक दल को 5 करोड़ और अन्य दलों को कुल मिलाकर 14.34 करोड़ मिले हैं। इसी साल अप्रैल में आई एडीआर के रिपोर्ट के अनुसार साल 2014-15 में चुनावी ट्रस्टों ने 177.55 करोड़ चंदे के रूप में कमाए हैं और उनमें से 177.40 करोड़ अलग-अलग राजनीतिक दलों को चंदे के रूप में दिया है।

गौरतलब है कि राजनीतिक दलों और कंपनी के बीच चंदे के लेन-देन में पारदर्शिता लाने के लिए 2013 में सरकार ने कंपनियों के द्वारा चुनावी ट्रस्टों को बनाने की अनुमति दे दी थी। इस नियम के अनुसार इन ट्रस्टों को जितना भी चंदा मिलेगा, वह उसका 95 प्रतिशत राजनीतिक दलों को देंगे।

मोदी ने दिए पार्टियों को लूट के लाइसेंस

500-1000 रुपये के पुराने नोट बंद होने के बावजूद राजनीतिक पार्टियों को पुराने नोटों को बैंकों में जमा करने कर इनकम टैक्स नहीं लगेगा। आईटी ऐक्ट, 1961 के सेक्शन 13A राजनीतिक दलों को टैक्स से छूट प्राप्त है। इसके अलावा राजनीतिक दल सूचना का अधिकार (आरटीआई) के दायरे में भी नहीं आते हैं।

हालांकि, पिछले दस सालों में राजनीतिक दलों की आय में करोड़ों रुपये का इजाफा है। कालेधन को रोकने की कोशिश में जुटे मोदी ने राजनीतिक दलों को लूट का एक तरह से लाइसेंस दे दिया है। इसी साल एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा चुनाव 2004 और लोकसभा चुनाव 2014 के बीच राजनीतिक दलों को मिले चंदे में 478 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।

राजनीतिक दलों को आधा पैसा मिलता है कालाधन

भले ही नोटबंदी के बाद सरकार डिजिटल ट्रांजेक्शन पर जोर दे रही है लेकिन साल 2004 से 2015 के बीच हुए विधानसभा चुनावों में विभिन्न राजनीतिक पार्टियों को 2,100 करोड़ रुपये चंदा मिला, जिसका 63 फीसदी हिस्सा कैश से आया था। इसके अलावा पिछले तीन लोकसभा चुनावों में मिले फंड में 44 फीसदी हिस्सा कैश का ही था।

आरटीआई कानून के दायरे में नहीं आतीं राजनीतिक पार्टियां

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई जिसमें बीजेपी, कांग्रेस, वाम दलों समेत सभी राष्ट्रीय, क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को ‘सार्वजनिक संस्था’ घोषित करते हुए उन्हें आरटीआई कानून के दायरे में लाने की मांग की गई थी। इस पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राजनीतिक दलों को आरटीआई के दायरे में लाने से उनके सहज संचालन पर असर पड़ेगा। साथ ही सरकार ने कहा कि इससे राजनीतिक विरोधियों को बुरे इरादों के साथ जानकारियां हासिल करने का हथियार भी मिल जाएगा। पिछले कुछ सालों से लगातार राजनीतिक दलों को आरटीआई के दायरे में लाने की मांग चल रही है।

फोटोः फाइल।