Tuesday, September 7, 2021

द्रोणाचार्य ने साबित कर दिया BJP का दलित प्रेम पाखंड

BJPलखनऊ (राजबीर सिंह, वरिष्ठ पत्रकार)।। भारतीय जनता पार्टी के नेता भले ही आपने को दलितों का हितैषी साबित करने में लगे हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा है नहीं। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 125 वीं जयंती पर भाजपा देश भर में ये संदेश देने की कोशिश कर रही है कि बाबा साहब ने दलितों के उत्थान के लिए जो काम किया व सपना देखा भाजपा उसी काम व बाबा साहब के सपने को आगे बढ़ा रही है। इस ड्रामे के बाद भी इस पार्टी की सोच पर सवाल तब खड़े हो जाते हैं जब हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर ने गुड़गांव का नाम बदलकर पांडवों के गुरू रहे द्रोणाचार्य के नाम पर गुरूग्राम रख दिया।

गौरतलब है कि द्रोणाचार्य का जिक्र देश के पौराणिक ग्रंथ महाभारत में ऐसे रूप में आता है, जिसने न केवल गुरू के नाम को कलंकित किया, बल्कि दलितों के प्रति उस काल के सामाजिक तानेबाने की सच्चाई भी बयां की। गुरू दक्षिणा में एकलव्य का अंगूठा मांग लेना ये किसी गुरू के गुरू होने पर ही सवाल खड़ा करता है। यदि अगर पांडवों के गुरू द्रोणाचार्य उस समय के महान गुरू थे, तो फिर इतिहास को झूठा करार दिया जाना चाहिये। द्रोणाचार्य महान गुरू तब होते, जब एकलव्य का अंगूठा मांगने के बजाय वो अर्जून को धनुर्विघा में इतना निपुण कर देते कि अर्जुन एकलव्य से महान धनुर्धर हो जाता, लेकिन ऐसा न कर आचार्य द्रोणाचार्य ने साबित किया न वो उस काल के सबसे महान आचार्य व गुरू थे और न ही दलितों के प्रति सोच में कोई बदलाव था। अब ऐसे में भाजपा का एक तरफ दलित प्रेम व दूसरी ओर गुड़गांव का नाम बदलकर द्रोणाचार्य के नाम से गुरू ग्राम रखना ये बताता है कि भाजपा का दलित प्रेम केवल पाखंड है इससे अधिक कुछ नहीं।

फोटोः गांव का नाम द्रोणाचार्य रखे जाने को लेकर विरोध प्रदर्शन करती छात्रा।