Wednesday, September 1, 2021

2019 के रण में BJP के ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं शिवपाल-राजा भैया !

उत्तर प्रदेश में बाहुबल की राजनीति करने वाले रघुराज प्रताप सिंह यानी राजा भैया एक बार फिर सियासत में अपना दम दिखा रहे हैं। इस बार कुंडा के राजा अपनी नई पार्टी लेकर सामने आए हैं। उधर, भतीजे अखिलेश यादव से मनमुटाव के बाद समाजवादी पार्टी छोड़कर सेक्युलर मोर्चा बना चुके शिवपाल यादव भी चुनावी मैदान में हैं।

राजा भैया

हालांकि, शिवपाल यादव और राजा भैया की पार्टियां किस तरह लोकसभा चुनाव में अपना असर छोड़ेगी, ये तो वक्‍त ही बताएगा। लेकिन, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इसे एक ऐसे मौके की तरह देख रही है, जो कांग्रेस समेत बाकी पार्टियों को मात देने में भगवा पार्टी की ताकत बढ़ा सकती है। जो बीजेपी के लिए एक ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं।

शिवपाल और राजा भैया की पार्टियों के बारे में यूपी कांग्रेस के प्रवक्ता हिलाल नकवी कहते हैं कि इन दोनों नेताओं का एक विशेष क्षेत्र है, जहां से ये दोनों नेता चुनाव जीतते आए हैं। राजा भैया प्रतापगढ़ के कुंडा और शिवपाल इटावा की जसवंतनगर सीट से चुनाव जीतते हैं। इन दोनों इलाकों को छोड़कर दोनों नेताओं का कोई खास असर नहीं है। उन्होंने बताया कि बीजेपी की हमेशा मंशा रहती है कि वो ज्यादा से ज्यादा वोटों का बंटवारा कर सके।

शिवपाल पहले ही कह चुके हैं कि इस आम चुनाव में उनकी पार्टी सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतरेगी। यहां तक कि वह अपने भतीजे और समाजवादी पार्टी चीफ अखिलेश यादव के खिलाफ भी प्रत्याशी खड़ा करेंगे। अभी तक अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से अपने चाचा शिवपाल यादव के इस ऐलान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन कई कार्यक्रमों में इशारों-इशारों में उन्होंने भी जता दिया है कि वो हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। सियासी गलियारों में ऐसी चर्चा है कि शिवपाल यादव की नई पार्टी बनाने के पीछे बीजेपी का सहयोग है।

शिवपाल के अलावा यूपी के एक और जाने-माने नेता रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया भी बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। बीजेपी शिवपाल यादव और राजा भैया को क्रॉसवर्ड के ऐसे दो हिस्सों के रूप में देख रही है, जिनके बिना पहेली सुलझाई नहीं जा सकती। शुक्रवार को जनसत्ता पार्टी प्रमुख राजा भैया ने लखनऊ के रमाबाई आंबेडकर मैदान में विशाल रैली की, बीजेपी की इसपर खास निगाह रही।