Thursday, September 2, 2021

खुलासा: नशेड़ियों के खून में सलाइन वाटर मिलाकर मरीजों को बेंच देते थे !

लखनऊ। केजीएमयू से लेकर लखनऊ के अन्य बड़े अस्पतालों में बढ़ती मरीजों की संख्या के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की मानीटरिंग बेहद कमजोर है। इसका नतीजा है कि राजधानी में मिलावटी खून का काला कारोबार पनपा और एक हजार से अधिक लोगों को उसे बेचा गया।

मिलावटी खून

लखनऊ। केजीएमयू से लेकर लखनऊ के अन्य बड़े अस्पतालों में बढ़ती मरीजों की संख्या के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की मानीटरिंग बेहद कमजोर है। इसका नतीजा है कि राजधानी में मिलावटी खून का काला कारोबार पनपा और एक हजार से अधिक लोगों को उसे बेचा गया।

एसटीएफ ने एक निजी ब्लड बैंक के दो कर्मचारियों समेत पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर इस सनसनीखेज प्रकरण का राजफाश किया।

गिरोह का सरगना मु.नसीम है, जो हसनगंज के मक्कागंज स्थित अपने घर में भी नशेडिय़ों का खून निकालता था। ब्लड बैग पर प्रतिष्ठित ब्लड बैंक के जाली स्टीकर भी चस्पा किए जाते थे। एक यूनिट खून में सलाइन वाटर मिलाकर उसे दोगुना कर गिरोह दोहरी कीमत पर बेचता था।

एसएसपी एसटीएफ अभिषेक सिंह के अनुसार करीब छह माह से सक्रिय गिरोह ने एक हजार से अधिक लोगों को मिलावटी खून बेचा है।

जरूरतमंद खोजकर खून की सप्लाई

एसटीएफ ने मु.नसीम के अलावा निरालानगर स्थित बीएनके ब्लड बैंक के लैब टेक्नीशियन बाराबंकी निवासी राघवेंद्र प्रताप सिंह, लैब अटेंडेंट बहराइच निवासी पंकज कुमार त्रिपाठी, सआदतगंज निवासी राशिद अली उर्फ आतिफ व निशातगंज निवासी हनी उर्फ रजनीश निगम को गिरफ्तार किया है।

सीओ अमित नागर के अनुसार, कक्षा नौ तक पढ़ा नसीम करीब तीन साल पहले निरालानगर स्थित बीएनके ब्लड बैंक में हेल्पर का काम करता था और वहीं उसका परिचय राघवेंद्र व पंकज से हुआ था।
राघवेंद्र व पंकज भी खून निकालने का काम करते थे, जबकि राशिद डोनर को पकड़कर लाता था और अस्पतालों के बाहर जरूरतमंदों को खोजकर खून की सप्लाई करता था। हनी ब्लड बैंक के जाली स्टीकर व अन्य प्रपत्र छपवाने के अलावा डोनर का बंदोबस्त भी करता था।

एसटीएफ को काफी दिनों से राजधानी में मिलावटी खून के कारोबार की भनक लगी थी, इस पर सिपाही राजेश मौर्य को गिरोह तक पहुंचने के लिए लगाया गया था।

पांच आरोपित गिरफ्तार

पूरी जानकारी जुटाने के बाद एसटीएफ ने फूड सेफ्टी एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के असिस्टेंट कमिश्नर (ड्रग्स) लखनऊ डिवीजन पीके मोदी को सूचना दी और उनकी मंडलीय टीम के साथ बीएनके ब्लड बैंक और टेढ़ीपुलिया स्थित मेडिसिन ब्लड बैंक में छापा मारकर छानबीन की।

इसके बाद मडिय़ांव थानाक्षेत्र में ए-1 रुकमनीपुरम, फैजुल्लागंज स्थित मकान से पांचों आरोपितों को गिरफ्तार किया। जहां 35 ब्लड बैग इनवाल, पांच ट्रिपल बैग सिस्टम, सात ब्लड बैग पैकेट, 70 सिंगल ब्लड बैग, तीन बोतल नार्मल सलाइन, 11 सीपीपी प्लेटलेट बैग, तीन पैकेट क्लैम्ब ब्लू कलर, तीन एचआइवी किट समेत अन्य सामान बरामद हुआ है।

फेल हो जाता है लिवर, किडनी व हार्ट

केजीएमयू के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. तूलिका चंद्रा कहती हैं कि खून की यूनिट बढ़ाने के लिए नॉर्मल सलाइन वाटर में लाल डाई मिलाकर खून तैयार किया जा रहा है। इससे मनुष्य के शरीर में संक्रमण होता है। हीमोग्लोबिन बढऩे की बजाय घट जाता है। इसके रिएक्शन से शरीर के अलग-अलग अंगों पर घातक असर पड़ता है।

व्यक्ति का लिवर, किडनी, हार्ट आदि फेल हो जाता है और उसकी मौत हो जाती है। डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. वीके शर्मा कहते हैं कि इस तरह के खून को शरीर में चढ़ाने से ब्लड से होने वाला हर तरह का संक्रमण हो सकता है क्योंकि इसमें बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं।