Tuesday, September 7, 2021

सीएम साहब, आंखें बंद मत करिए, यहां रो रहा है समाजवाद

MAHENDRA-NATH-YADAVलखनऊ (रामानुज)।। बस्ती जिले में समाजवाद का मर्डर कर दिया गया। यहां समाजवाद अपने ही कुनबे के मंत्री और जिलाधिकारी के पैरोंतले रौंदा जा रहा है, यह हाल तब है जब यहां पर समाजवादी पार्टी की हालत पहले से ही खस्ताहाल है। यह वही जिला है, जहां से कभी कोई यादव जाति का मानव आजादी के बाद विधायक नहीं बना। यहां समांतवाद की तूती बोलती है। चाहे समाजवादी पार्टी की सत्ता हो किसी अन्य पार्टी की, लेकिन यहां दलितों, पिछड़ों, यादवों का नेता पैदा नहीं होने दिया गया।

गौरतलब है कि बस्ती जिले में पंचायत चुनाव में महेंद्र नाथ यादव और उनकी माता को हराने का आरोप वहां के समाजवादी कार्यकर्ताओं ने लगाया है। आरोप है कि यूपी सरकार के जुझारू मंत्री राम करन आर्य से लेकर संगठन के कई लोगों को जिलाधिकारी कार्यालय पर इस लिए धरना देना पड़ा कि दोबारा मतगणना की जाए और न्याय हो, लेकिन दो दिन तक चला यह धरना प्रदर्शन भी जिलाधिकारी अनिल दमेले को कुभकर्ण की नींद से जगा नहीं पाया। जब सपा के कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना दे रहे थे, उसी समय युवा समाजवादी नेता महेंद्र नाथ यादव को हराने का खेल बस्ती के जिलाधिकारी अनिल दमेले खेल रहे थे। लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि मतगणना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी कर इस लिए महेंद्र नाथ यादव और उनकी मां को हरा दिया गया, क्योंकि मंत्री राजकिशोर सिंह अपने बेटे को बस्ती जिलापंचायत अध्यक्ष बनवाना चाहते हैं। यदि महेंद्र नाथ यादव जीत जाते, तो वह जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए प्रबल दावेदार बन जाते और बस्ती जिले में एक युवा समाजवादी नेता पार्टी को मजबूत करता। जो सामंतवाद को मंजूर नहीं था।

क्या कहते हैं धरना दे रहे सपा नेता

12190971_697471603723764_1545110627928814220_nबस्ती जिले के 12191777_10201378690786185_3039047540324542079_nस्थानीय समाजवादी पार्टी के नेताओं के मुताबिक, जिला पंचायत क्षेत्र कुदरहा द्वितीय से महेंद्र नाथ यादव चुनाव लड़ रहे थे। वह यहां से बसपा के समय में भी जीतते रहे हैं, लेकिन सपा के सरकार में ही उन्हें हराने की साजिश की गई और हरा दिया गया। इसके साथ ही उनकी माता जी सूर्य मुखी देवी क्षेत्र पंचायत बहादुरपुर तृतीय से मैदान में थीं। उन्हें भी वोटिंग में गड़बड़ी कर हरा दिया गया। इन दोनों सीटों पर जीत से महेंद्र यादव मजबूत होते। इसकी वजह से ही उन्हें कमजोर करने के लिए यह साजिश की गई। दोबारा मतगणना तो करवाई जा सकती थी, लेकिन जिलाधिकारी अनिल दमेले की मिली भगत से यह नहीं हो सका और जल्दी बाजी में प्रमाण पत्र बांट दिए गए। जिलाधिकारी और एक मंत्री राजकिशोर के खिलाफ कार्यकर्ताओं के साथ राजाराम यादव (पूर्व जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टी), बृजेश मिश्र, व चारों फ्रंटल के जिला अध्यक्ष सहित हजारों की संख्या में सपा कार्यकर्ताओं ने पुर्न मतगना करने के संबंध में मांग की और जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना दिया, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया। 

यही नहीं, बस्ती जिले में जब बसपा की सत्ता थी तो सपा के प्रचार प्रसार के लिए महेंद्र नाथ यादव पर पुलिस ने डंडे भी बरसाए थे। वह सीएम अखिलेश यादव की उस टीम के भी हिस्से थे जो नेपाल में भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए गई थी। महेंद्र नाथ यादव को मुख्यमंत्री से लेकर नेता जी तक हर कोई जानता है। ऐसे में एक जुझारू समाजवादी युवा नेता के साथ इस तरह का व्यवहार लोहिया और मुलायम सिंह यादव के समाजवाद पर तमाचा है। मुख्यमंत्री और प्रदेश के अध्यक्ष अखिलेश यादव को ऐसे गंभीर मुद्दों पर आंखें बंद नहीं करनी चाहिए, क्योंकि प्रदेश के करोड़ों युवा उनकी ओर आशा से देख रहे हैं। यदि ऐसा ही होगा तो समाजवाद को सामंतवाद बनने में देर नहीं लगेगी। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री समय रहते बस्ती जिले को उजाड़ होने से बचाएंगे।

फोटोः जिलाधिकारी कार्यालय पर समर्थकों के साथ पुनः मतगणना के लिए धरना देते हुए मंत्री रामकरन आर्य और युवा नेता महेंद्र नाथ यादव (सबसे ऊपर फोटो में)।