Monday, September 6, 2021

बैंक में नहीं है minimum balance तो न हों परेशान, पढ़ें यह खबर

rbiनई दिल्ली ।। बैंक खाते में अब मिनिमम बैलेंस हो जाने पर भी आपके ऊपर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नोटिस जारी कर बैंकों से कहा है कि वे मिनिमम बैलेंस के जीरो हो जाने के बाद नॉन मेंटीनेंस चार्ज लगाना बंद करें। इससे सेविंग अकाउंट में बैलेंस शून्य होने पर लगने वाला नॉन मेंटीनेंस चार्ज अब नहीं देना होगा। आरबीआई ने इस संबंध में सभी बैंकों को नोटिस जारी किए हैं।

दरअसल, सेविंग अकाउंट में बैंकों ने न्यूनतम बैलेंस की सीमा तय कर रखी है। बैलेंस कम होने पर बैंक अकाउंट मेंटेन न रखने के एवज में ग्राहकों से पैसे वसूलते हैं और बैलेंस शून्य होने पर भी बैंक ये चार्ज लगाते हैं, जिससे अकाउंट में निगेटिव बैलेंस आ जाता है।

पिछले साल से ही यह नियम प्रभावी हो गया था, लेकिन कुछ बैंक अभी भी यह चार्ज वसूल रहे थे। जारी नोटिस के मुताबिक अब अगर कोई बैंक बचत खाते से चार्ज वसूलता है और इससे बैलेंस माइनस में चला जाता है, तो ग्राहक इसकी शिकायत कर सकता है। ज्‍यादातर यह समस्या सैलरी अकाउंट मामले में होती है। इसमें नौकरी देने वाली कंपनी सैलरी अकाउंट खुलाती है, लेकिन नौकरी बदलने पर वह बैंक खाता बचत खाते में बदल जाता है। इसके बाद बैंक मिनिमम बैलेंस का नियम लगा देते हैं। इसके चलते वे नॉन मेंटीनेंस चार्ज वसूलते हैं, इससे बैलेंस माइनस में चला जाता है। अगर कोई बैंक ऐसा करता है और अकाउंट बैलेंस नेगेटिव (माइनस) होता है तो कस्टमर बैंकिंग लोकपाल से शिकायत कर सकते हैं।

आरबीआई ने 2014 में इस संबंध में दिशानिर्देश बदले थे। इसके बाद एक अप्रैल 2015 से यह निर्देश लागू हो गए थे। आरबीआई ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि ग्राहकों की परेशानी का फायदा ना उठाएं और बैंक बैलेंस से पैसा काटने से पहले वे ग्राहकों को एडवांस नोटिस दें।

अब तक सामने आए मामलों में ज्यादातर ऐसा तभी होता है जब कोई ग्राहक अपनी जॉब बदलता है और उसके सैलरी अकाउंट में पैसे आना बंद हो जाते हैं। ज्यादातर बैंक सैलरी अकाउंट में विशेष सुविधाएं देते हैं, और तब उसमें न्यूनतम बैलेंस की शर्त नहीं होती, लेकिन जॉब बदलते ही बैंक उस अकाउंट पर न्यूनतम बैलेंस लिमिट की शर्त जोड़ देते हैं। इससे कई बार ग्राहकों का बैलेंस नेगेटिव हो जाता है और जब भी वह अकाउंट में पैसे जमा करेगा, उतने पैसे खुद ब खुद काट लिए जाते हैं। इस तरह के मामले सबसे अधिक सैलरी अकाउंट के साथ देखने को मिले हैं। दरअसल कंपनी किसी भी कर्मचारी का सैलरी अकाउंट खुलवाती है, लेकिन जैसे ही वह व्यक्ति नौकरी छोड़कर कहीं और चला जाता है तो वहां पर उसकी कंपनी दूसरा सैलरी अकाउंट खुलवा देती है।

फोटोः फाइल।