Tuesday, September 7, 2021

एक पैर से एवरेस्ट फतह कर बनी विश्व की पहली महिला, अब मंदिर में उसकी दिव्यंगता का मजाक

न्यूज डेस्क. एक पैर नकली होने के बावजूद दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी-एवरेस्ट को फतह करने वाली विश्व की पहली महिला पर्वतारोही और राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा की दिव्यंगता का मध्यप्रदेश, उज्जैन के महाकाल मंदिर में मजाक बनाया गया। ये जानकारी उन्होंने अपने ट्विटर पर दी।

अरुणिमा सिन्हा

मंदिर में मेरी दिव्यंगता का मज़ाक़ बना

उन्होंने ट्विटर पर पीएमओ और मध्यप्रदेश के सीएम को टैग करते हुए लिखा है, ‘मुझे आपको ये बताते हुए बहुत दुःख है की मुझे एवरेस्ट जाने में इतना दुःख नहीं हुआ जितना मुझे महाकाल मंदिर उज्जैन में हुआ वहां मेरी दिव्यंगता का मज़ाक़ बना।

 

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सिक्योरिटी ने अरुणिमा को रोका

उन्होंने एक दिन पहले के अपने खराब अनुभव को याद करते हुए बताया कि मंदिर में उन्हें किस अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा। मंदिर के सूत्रों की मानें तो मंदिर की सिक्योरिटी ने अरुणिमा को यह कह कर रोक दिया कि वो लोअर, टी-शर्ट और जैकेट पहन कर मंदिर के अंदर नहीं जा सकतीं ।

 

अरुणिमा सिन्हा

अरुणिमा ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है

महाकाल मंदिर के प्रशासनिक अधिकारी अवधेश शर्मा का कहना है कि हमें मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए इस घटना का पता लगा। उन्होंने बताया कि अरुणिमा ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है और सीसीटीवी के जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

 

लुटेरों ने अरुणिमा को रेलगाड़ी से नीचे फेंक दिया था

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर अंबेडकर नगर की अरुणिमा सिन्हा आज किसी परिचय की मोहताज नहीं। 2011 में लखनऊ से दिल्ली आते वक्त लुटेरों ने अरुणिमा को रेलगाड़ी से नीचे फेंक दिया था। दूसरी पटरी पर आ रही रेलगाड़ी की चपेट में आने के कारण अरुणिमा का एक पैर कट गया था।

पर्वतारोही बनकर एवरेस्ट फतह करने की ठानी

इसके बाद अरुणिमा ने शासन और प्रशासन से तमाम लड़ाइयां लड़ीं और अपना हक लेकर रहीं। वैसे उन्होंने उस रेल दुर्घटना में जो खोया, उसे वह फिर से हासिल नहीं कर सकती थीं लेकिन अरुणिमा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक पर्वतारोही बनकर एवरेस्ट फतह करने की ठानी।

 

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