Monday, August 30, 2021

EXCLUSIVE : चुनाव से पहले आरक्षण बांटने की तैयारी, डीओपीटी को भेजा प्रस्ताव

LLराष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने डीओपीटी को भेजा प्रस्ताव, अमल करने का काम तेज, यूपी चुनाव में बन सकता है बड़ा मुद्दा, दैनिक दुनिया डॉटकाम के पास है केंद्र सरकार का गोपनीय दस्तावेज

लखनऊ (अखिलेश कृष्ण मोहन) ।। यूपी में विधानसभा चुनाव के पहले केंद्र सरकार पिछड़ों के आरक्षण को तीन भागों में बांटने की तैयारी कर रही है। इसको लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) रिजर्वेशन डिवीजन को पत्र भी भेज दिया गया है। मिले गोपनीय दस्तावेज से यह खुलासा हुआ है कि यूपी चुनाव के पहले ही पूरे देश में आरक्षण को बांटने की तैयारी की जा रही है। हालांकि दस्तावेज में इसे सामाजिक न्याय का चोला ओढ़ाया गया है।

गोपनीय दस्तावेजों से मिली जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने पिछले साल अक्टूबर महीने में यह प्रस्ताव तैयार किया था। डीओपीटी को भेजे गए इस प्रस्ताव पर गंभीरता से काम हो रहा है। सूत्रों की माने तो केंद्र सरकार का दबाव है कि जल्द से जल्द इसके मसौदे को अमली जामा पहनाने को लेकर शासनादेश जारी किया जाए। इस प्रस्ताव में लिखा है कि पिछड़ी जातियों को कुल तीन भागों में विभाजित कर दिया जाए। इसमें पहला हिस्सा होगा पिछड़ा वर्ग (बैकवर्ड जाति), दूसरे हिस्से का नाम दिया गया है अति पिछड़ा वर्ग (मोर बैकवर्ड जाति), तीसरा हिस्से को महा पिछड़ा वर्ग (एक्सट्रीमली बैकवर्ड) नाम दिया गया है। यहां पर यह भी लिखा गया है कि पिछड़ों के आरक्षण को जनसंख्या के अनुपात में बांटने का प्रस्ताव है, लेकिन असल सवाल तो यह है कि जब वास्तविक जातीय जनगणना हुई ही नहीं तो क्या केवल अनुमानों के आधार पर जातीय आरक्षण को बांट का खेल किया जा रहा है।

देश की आजादी के बाद सबसे पहले जो सूची बनी थी, उसमें अनुसूचित जाति और जनजाति को आरक्षण दिया गया था। इसके बाद मंडल कमीशन ने पिछड़ों की जनसंख्या को देखते हुए उनके आरक्षण का मसौदा तैयार किया। इसे लांगू करने में कई साल लग गए, लेकिन अब एक बार फिर पिछड़ों के आरक्षण को बांटने का जो खेल शुरू होने जा रहा है, वह कई सवाल खड़ा कर रहा है। मसलन क्या इसके लिए कोई कमीशन बनाया जाएगा, जो इस आरक्षण का विभाजन जातियों की संख्या के आधार पर करेगा या इसके लिए मनमानी कर मामला कोर्ट के हवाले कर दिया जाएगा। अंदेशा तो यह भी है कि इससे पूरे देश में एक बार फिर आरक्षण को लेकर आग भड़केगी और देश मोदी और मंडल-कमंडल में उलझकर रह जाएगा।

गुजरात और हरियाणा में सरकार फेल

गुजरात और हरियाणा में आरक्षण की आग बुझी नहीं है, बल्कि वह चिनगारी बनकर सुलग ही रही है। इसको लेकर केंद्र सरकार के पास कोई ठोस रणनीति अभी तक नहीं है। गुजरात में हार्दिक पटेल जहां पिछड़ी जातियों में पटेल विरादरी को शामिल करने को लेकर आंदोलन करने की तैयारी कर रहा है, वहीं हरियाणा में जाट आरक्षण लागू नहीं होने से यह मुद्दा एक बार फिर भड़क सकता है। आरक्षण के आंदोलन के जानकारों की माने तो केंद्र सरकार की यह चाल समाज को बांटने का काम करेगा। इससे पिछड़ा वर्ग आपसी खींचतान में उलझकर रह जाएगा और सबसे अधिक फायदा अगड़ी जातियों को होगा।

नौकरियों में नए आरक्षण से घटेगा प्रतिशत

पिछड़ी जातियों को चार भागों में बांटने से नौकरियों में बड़ा अंतर आएगा। इससे पिछड़ी जातियों की संख्या और भी कम हो जाएगी। जहां अभी तक शुरूआत के चार पदों में एक पद पिछड़ी जातियों को मिलते थे, वहीं पर नए आरक्षण के लागू होने पर 11 पद होने पर केवल एक पद मिलेंगे। यानी केंद्रीय शिक्षण संस्थानों और राज्य शिक्षण संस्थानों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर का पद शून्य हो जाएगा। इन पदों पर आजादी के 66 साल बाद भी जहां पिछड़ी जातियों और अनुसूचित जाति, जन जातियों का प्रतिनिधित्व न के बराबर है, वहीं यह और भी कम हो जाएगा।

फोटोः फाइल।