Saturday, September 4, 2021

MLC बनेंगे वाजपेयी , SP-BSP ने जारी की सूची

resizedimageलखनऊ।। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनों ही दलों ने अपने उम्मीदवारों के संकेत दे दिए हैं। समाजवादी पार्टी छह अन्य उम्मीदवारों के साथ ही लखनऊ के वरिष्ठ सपा नेता अशोक वाजपेयी को एमएलसी का तोहफा देने जा रही है। वह लंबे समय से सपा से जुड़े रहे हैं। इसके पहले उन्हें लखनऊ लोकसभा सीट से उम्मीदवार भी बनाया गया था, लेकिन बाद में टिकट काट दिया गया।

सपा और बसपा ने विधान परिषद के लिए 30 जनवरी को खाली हो रही सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए हैं। इस बार कुल 12 सीटों के लिए चुनाव हो सकते हैं। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार अधिसूचना छह जनवरी को जारी होगी। नामांकन भरने की आखिरी तारीख 13 जनवरी है। नामांकन की जांच 14 जनवरी और नाम वापसी की आखिरी तारीख 16 जनवरी होगी। वोटिंग 23 जनवरी को सुबह 9:00 से शाम 4:00 बजे तक होगी। 23 जनवरी को ही शाम 5:00 बजे वोटों की गिनती होगी। विधान परिषद् चुनाव की प्रक्रिया 27 जनवरी तक पूरी होनी है।

चुनाव के लिए सपा ने अपने तीनों पुराने विधायकों के नाम इस सूची में शामिल किए हैं। इनमें अहमद हसन, रमेश यादव और डॉ. सरोजिनी अग्रवाल हैं। इसके साथ ही वीरेंद्र गुर्जर, आशु मालिक, राम जतन राजभर, साहिब सिंह सैनी और अशोक वाजपेयी के नाम हैं। पहले आशु मलिक की जगह मऊ जिले के यशवंत सिंह का नाम था, जिसे बाद में बदल दिया गया।

वाजपेयी को देर से मिला बड़ा ईनाम

सपा द्वारा जारी लिस्ट में एक नाम ऐसा भी शामिल है, जिसे काफी अहम माना जा रहा है। वह हैं अशोक वाजपेयी। लोक सभा चुनाव में लखनऊ से उम्मीदवारी से हटाने के बाद पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भी नहीं भेजा था। इसके बाद सपा पर उनके साथ नाइंसाफी करने का भी आरोप भी विशेष वर्ग के लोग लगाने लगे थे। अब वह लखनऊ में रहकर ही जनता की सेवा कर सकेंगे और मुद्दे भी उठाते रहेंगे।

बसपा की लिस्ट में कौन है शामिल

हालांकि बसपा केवल दो लोगों को आसानी से विधान परिषद भेज सकती है। इसमें नसीमुद्दीन सिद्धिकी और धर्मवीर सिंह का नाम प्रमुख रूप से बताया जा रहा है, लेकिन चर्चा यह भी है कि प्रदीप को भी पार्टी उतारने की कोशिश में है। बसपा अपने दो सदस्यों को विधान परिषद में आसानी से पहुंचा पाएगी। उसके कुल 80 विधायक हैं।

क्या है विधान परिषद के चुनाव का गणित

यूपी विधानपरिषद में चुनाव का गणित कुछ ऐसा होता है। एक विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) के चुनाव के लिए विधानसभा के 36 विधायकों की जरूरत होती है। विधानसभा में सहयोगी दलों के साथ सपा के पास 235 विधायक हैं। ऐसे में खाली हुई एक दर्जन सीटों में से सपा छह सदस्यों को जिताने में कामयाब रहेगी। इसके बाद भी उसके पास 19 वोट बचेंगे।

तस्वीरः फाइल।