Monday, August 30, 2021

प्रेमी संग गई लड़की को दरोगा ने बताया नाबालिग, तो हुए निलंबित

Lucknow. प्रेमी संग गई लड़की के उम्र के चक्कर में देवरनिया थाने के दरोगा जी निलंबित हो गए। हाईकोर्ट ने लड़की और उसके प्रेमी समेत पांच लोगों की गिरफ्तार पर रोक लगाई थी। दरोगा ने जिस लड़की को नाबालिग समझते हुए बरामद कर CWC के सामने पेश किया था। उसको हाईकोर्ट ने बालिग माना। हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी के मामले में एसएसपी ने देवरनिया थाने के दरोगा रणधीर सिंह को निलंबित कर हाईकोर्ट को रिपोर्ट भेज दी।

दरोगा

देवरनिया इलाके की लड़की पीलीभीत के प्रेमी के साथ फरार हो गई थी। लड़की के पिता ने देवरनिया थाने में प्रेमी पर पाक्सो एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। पिता ने लड़की को नाबालिग बताते हुए शैक्षिक प्रमाण पत्र जमा किए थे। प्राथमिक स्कूल के शिक्षक के बयान और शैक्षिक प्रमाण पत्र के आधार पर लड़की की उम्र 17 साल दिखाई गई। लड़की ने प्रेमी के साथ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर खुद को बालिग बताया। अधिकारियों के मुताबिक लड़की ने खुद बालिग साबित करने के लिए मेडिकल रिपोर्ट लगाई।

हाईकोर्ट ने लड़की को बालिग मानते हुए 12 अप्रैल को गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। बावजूद इसके 23 अक्तूबर को देवरनिया पुलिस ने लड़की को बरामद कर नारी निकेतन के सामने पेश किया। पुलिस ने CWC को हाईकोर्ट के आदेश के बारे में जानकारी नहीं दी। CWC ने लड़की को नारी निकेतन भेजा दिया। प्रेमी ने आदेश का पालन न होने पर हाईकोर्ट में शिकायत कर दी। हाईकोर्ट ने डीएम और एसएसपी को आदेश अनुपालन कराने को कहा। एसएसपी मुनिराज ने देवरनिया थाने के दरोगा रणधीर सिंह को निलंबित कर दिया।

CWC ने लड़की को रिहा करने के दिए आदेश

देवरनिया पुलिस ने हाल में CWC में हाईकोर्ट के ऑर्डर की कॉपी दाखिल की। हाईकोर्ट के ऑर्डर पर अमल करते हुए CWC ने लड़की को नारी निकेतन से रिहा करने के आदेश जारी कर दिए। हालांकि आदेश के चार दिन बाद भी देवरनिया पुलिस अभी नारी निकेतन से लड़की को नहीं ले गई है।

हाईकोर्ट के आदेश के बारे में पुलिस ने पहले जानकारी नहीं दी थी। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट का आदेश CWC को मुहैया कराया गया। 22 को लड़की को नारी निकेतन से रिहा करने के आदेश दे दिए गए हैं।- डा. डीएन शर्मा, मजिस्ट्रेट, CWC

कानूनविद की सुनिए

वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल भटनागर ने बताया कि अगर गलत तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट से किसी ने ऑर्डर जारी करा लिया है तो दूसरी पार्टी को कोर्ट के संज्ञान में इसको लाना चाहिए था। हाईकोर्ट में सबूत पेश करने चाहिए थे। हाईकोर्ट अपने ऑर्डर का रिव्यू कर सकता है। कोर्ट को धोखा देने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।