Thursday, September 2, 2021

धनतेरस: सोना खरा है या मिलावटी, शुद्धता की जांच परककर करें खरीदारी !

बिजनेस डेस्क. भारतीय परंपरा के मुताबिक धनतेरस से लेकर दिवाली तक सोने की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। इस विशेष अवसर पर लोग सोने के सिक्के, ज्वैलरी और चांदी के बर्तन खरीदते हैं। हालांकि, इस दौरान सोना-चांदी के दुकानों पर भारी भीड़ रहती है, इसलिए धोखाधड़ी के शिकार होने का खतरा बहुत ज्यादा रहता है।

अगर, आप भी अपने या परिवार के लिए इस धनतेरस पर सोने-चांदी की खरीदारी करने जा रहे हैं तो हम आपको खरीदने से पहले इससे जुड़े कुछ मह्त्वपूर्ण बातों की जानकारी दे रहे हैं। इनको अमल में लाकर आप न सिर्फ धोखाधड़ी से बच सकते हैं बल्कि बचत भी कर सकते हैं।

हॉलमार्क ज्वैलरी ही खरीदें

सोने की दुकान से हमेशा हॉलमॉर्क वाली ज्वैलरी ही खरीदें। हॉलमार्क लगी ज्वैलरी इस बात की गारंटी है कि ज्वैलरी शुद्ध है क्योंकि यह निसान भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा दिया जाता है। अगर हॉलमार्क वाले आभूषण पर 999 लिखा है तो सोना 99.9 फीसदी शुद्ध है। अगर, हॉलमार्क के साथ 916 का अंक लिखा हुआ है तो वह आभूषण 22 कैरेट का है और 91.6 फीसदी शुद्ध है।

सोना

इस तरह पहचानें असली हॉलमार्किंग

किसी ज्वैलरी पर हॉलमार्किंग का निसान वास्तविक या नकली है इसकी पहचान करना बहुत ही आसान है। असली हॉलमार्किंग पर भारतीय मानक ब्यूरो का तिकोना निशान होता है। उस पर हॉलमार्किंग सेंटर के लोगो के साथ सोने की शुद्धता भी लिखी होती है। उसी में ज्वैलरी निर्माण का वर्ष और उत्पादक का लोगो भी होता है। वहीं, नकली हॉलमार्किंग पर निसान के अलावा कुछ नहीं होता है। कुछ ही ज्वैलर्स बिना जांच प्रकिया पूरी किए ही हॉलमार्क लगा रहे हैं।

पत्थर लगी ज्वैलरी खरीदने से बचें

पत्थर लगी सोने की ज्वैलरी खरीदने से बचना चाहिए। इसकी वजह यह है कि सोने की ज्वैलरी में जो पत्थर लगे होते हैं वो कोई कीमती नहीं बल्कि मामूली पत्थर होते हैं। यानी उस पत्थर की कीमत कुछ भी नहीं होती है।

जब आप ज्वैलरी खरीदते हैं तो तो जौहरी कहता है कि इसमें इतने वजन का सोना और इतने भार का पत्थर है। आपको इस दर से सोने का भाव देना होगा। आपके पास जौहरी की कही बात को मानने के सिवा दूसरा कोई चारा नहीं होता है। ऐसे में संभव है कि आपको सोने से अधिक कीमत चुकानी पड़ी। इसलिए इससे बचने का प्रयास करें।

कीमत को लेकर रहें सावधान

सोने की ज्वैलरी कभी भी 24 कैरेट गोल्ड से नहीं बनती है। यह 22 कैरेट में बनती है और हमेशा 24 कैरेट गोल्ड से सस्ती होती है। इसलिए जब भी सोने की ज्वैलरी खरीदें तो यह ध्यान रखें कि जौहरी आपसे 22 कैरेट के हिसाब से पैसा ले रहा है। जौहरी से सोने की शुद्धता और कीमत को बिल पर जरूर लिखवाएं।

मेकिंग चार्ज को लेकर तोलमोल करें

जौहरी सोने-चांदी की ज्वैलरी पर मेकिंग चार्ज लेते हैं। अक्सर देखा गया है कि छोटी सी ज्वेलरी पर भी कुछ ज्वेलर्स उतना ही चार्ज वसूलते हैं, जितना बड़ी व हैवी ज्वेलरी पर। धनतेरस के दिन मांग बहुत ज्यादा होने से जौहरी ज्यादा मेकिंग चार्ज वसूल लेते हैं। इसके लिए पहले से तैयार रहें और ज्वैलरी का पैसा चुकाने से पहले जितनी तोलमोल कर सकते हैं, करें। इससे आप अच्छी राशि की बचत कर सकते हैं।

शुद्धता प्रमाणपत्र लेना न भूलें

गोल्ड ज्वैलरी खरीदते वक्त आप सर्टिफिकेट लेना न भूलें। सर्टिफिकेट में गोल्ड की कैरट क्वॉलिटी भी जरूर चेक कर लें।

बिल की पक्की पर्ची ही लें

सिक्का या ज्वैलरी खरीदते वक्त कच्ची पर्चियां लेकर कुछ पैसा बचाने का ट्रेंड है। लेकिन यह गलत धारणा है। कई बार वापसी के वक्त ज्वैलर खुद ही अपनी कच्ची पर्ची नहीं पहचानते, इसलिए पक्का बिल जरूर लें।