Sunday, September 5, 2021

गोरखपुर में थी 3 दामाद अफसरों की सत्ता, CM ने की कार्रवाई

TIS_8062 (1)लखनऊ ।। यूपी का गोरखपुर एक बार तीन दामादों की सत्ता को लेकर चर्चा में आ गया है। यहां हुए बवाल और समाजवादी पार्टी के नेता, वकील गौरव यादव को नंगाकर पिटाई किए जाने को लेकर नया नेक्सस निकलकर सामने आ गया है। मामले की गंभीरता को समझते हुए मुख्यमंत्री ने फौरन एसएसपी अनंत देव तिवारी और चार बदमाश पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया है। जिलाधिकारी ओएन सिंह का बाद में तबादला कर दिया गया, लेकिन गोरखपुर के सूत्र बताते हैं कि इन अधिकारियों की साठगांठ से वहां पर समाजवादी पार्टी की सत्ता नहीं, बल्कि इनका ही साम्राज्य चल रहा था। डीएम और एसएसपी मिलकर समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को घास नहीं डालते थे। वहां पर क्या खेल चल रहा था। इसे वहां तैनात दरोगा और एसओ कौन है इसकी पड़ताल से चल सकता है। ओएन सिंह आनन-फानन में बड़ी जोड़ तोड़ से गोरखपुर के जिलाधिकारी बने थे। इसके लिए उन्हें बहुत पापड़ भी बेलने पड़े थे।Danger Close live streaming movie

गोरखपुर से मिली पुखता जानकारी के अनुसार भले ही इस बवाल और मार पिटाई से इन दोनों अधिकारियों पर गाज गिरी है, लेकिन इसकी वजह से वहां पर बड़ा बवाल कभी भी हो सकता था। इसकी वजह यह थी कि जिलाधिकारी ओएन सिंह से लेकर एसएसपी अनंत देव तिवारी और सीडीओ तीनों ही अधिकारियों की ससुराल गोरखपुर में ही है। इसकी वजह से यहां इन अधिकारियों के ससुराल वाले जमकर फायदा उठा रहे थे और ये अधिकारी अपने रिश्तेदारों की सिफारिश पर ही पुलिसकर्मियों थानेदारों की ट्रांस्फर पोस्टिंग करते थे। थानेदारों पर इन दोनों ही अधिकारियों का हाथ होता था।

पहले बात वहां पर एसएसपी रहे अनंत देव तिवारी की करते हैं। अनंत देव तिवारी फतेहपुर जिले से हैं। उनकी गोरखपुर के पास सराया तिवारी में ससुराल है। गोरखपुर के स्थानीय सूत्र बताते हैं कि अनंत देव तिवारी के ससुराली पक्ष का भी ट्रांस्फर पोस्टिंग में बड़ा हाथ रहा है। इसकी वजह से गोरखपुर में दलालों का रैकेट काम कर रहा था। जिन तीन एसआई को निलंबित किया गया है, संयोग से वह भी मुफ्त में मृतक आश्रित में नौकरी पाए थे, उन्हें किसी तरह की कोई मेहनत नहीं करनी पड़ी थी। शायद यही वजह रही कि वह नौकरी की अहमियत और पुलिस विभाग की गाइडलाइन को समझ नहीं पाए और एसएसपी को नरेंद्र प्रताप, दिनेश तिवारी और मृत्युंजय सिंह, और सिपाही योगेश सिंह को निलंबित करना पड़ा। हालांकि सामंतवादी ताकतें एसएसपी के निलंबन को गलत बताने पर तुली हुई हैं।

वहीं दूसरी ओर गोरखपुर के जिलाधिकारी रहे ओेएन सिंह बस्ती जिले के बेलाड़ी के रहने वाले बताए जा रहे हैं। उनकी भी ससुराल गोरखपुर के सेवई बाजार में हैं। उनका कथित साला सुनील सिंह जो एडीएम का स्टेनो है। वह ओएन सिंह की डीलिंग में पूरी मदद करता था। तहसीलदार, लेखपाल, पटवारी को कहां जाना है, कितना देना है, पूरी वसूली का काम वही करता था। यही नहीं, किस योजना में धन जल्दी देना है और कहां पर रोक लगानी है, इसकी ठेकेदारी भी सुनील सिंह ही करता था। गोरखपुर के जानकार बताते हैं कि सुनील सिंह इन आठ महीनों में ही करोड़पति हो गया।

यह भी बताया जाता है कि जिलाधिकारी रहे ओएन सिंह के ससुराल के कई रिश्तेदार कमीशनखोरी में लगे हुए थे। इसकी वजह से ही ओेएन सिंह ने सेवही के तीन और कुशमोल के एक परिवार को अपने विशेषाधिकार का इश्तेमाल करते हुए लोहिया आवास भी दे दिया था। जबकि ये गांव लोहिया ग्राम नहीं थे। इसे भी ओएन सिंह की ससुराल पक्ष का असर बताया जाता है।

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तीसरा मामला सीडीओ को लेकर है। उनका नाम मन्नान अखतर है। इनकी भी ससुराल गोरखपुर के तुर्कमानपुर में ही है। हालांकि सीडीओ काफी सहज और शरीफ बताए जाते हैं, लेकिन यह संयोग तो रहा ही है कि जिले के तीन बड़े अधिकारियों की ससुराल गोरखपुर में ही रही। हालांकि मुख्यमंत्री को शिकायतें काफी दिनों से मिल रही थीं, इसके बाद भी कोई कार्रवाई, इस लिए नहीं की गई क्योंकि इसके पुखता प्रमाण नहीं मिल रहे थे।

गोरखपुर में हैं एसपी (आरए) ब्रजेश सिंह का जाल

जानकार मानते हैं कि गोरखपुर में पुलिसकर्मियों के तबादलों में एसपी ग्रामीण ब्रजेश सिंह का सिक्का चलता है। वहां पर ओेएन सिंह के आने से वह और तेज हो गया था। यहां पर ब्रजेश सिंह पिछले दो सालों से तैनात है। ब्रजेश सिंह और ओएन सिंह मिलकर अनंत देव तिवारी से हर काम करवा लेते थे। इसकी भनक भी मुख्यमंत्री को थी। मुख्यमंत्री ने दो अधिकारियों को हटाकर इनकी तिगड़ी को तोड़ने का काम किया है। हालांकि अभी ब्रजेश सिंह का तबादला होना बाकी है।

फोटोः मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने सरकारी आवास पर गोरखपुर मामले को सुनते हुए। 

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