Sunday, September 5, 2021

परिचालक भर्तीः यूपी में इस तरह से नौकरियों में हो रहा है घपला

upsssc_650_070715060903विधानसभा चुनाव को देखते हुए यूपी सरकार सामान्य वर्ग को लुभाने में जुट गई है। यूपी में हर विभाग की नौकरियों में सामान्य वर्ग को 50 फीसदी आरक्षण देने का खेल चल रहा है।

लखनऊ (डीडीसी न्यूज़ एजेंसी)।। यूपी में आरक्षण पर सबसे बड़ा हमला यूपी सरकार कर रही हैं। वहां संविधान को दरकिनार कर सामान्य वर्ग को 50 फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है और ओबीसी एससी कटेगरी समेत अन्य वर्ग को उनके वर्ग में ही सीमित रखने का षण्यंत्र किया जा रहा है। ताजा मामला 1690 पदों के लिए हुए परिचालक पदों का है। इसमें लिखित परीक्षा के लिए रिजल्ट घोषित किए गए हैं। जहां पिछड़ी जातियों (ओबीसी) की मेरिट सूची 246 अंक गई है और अनुसूचित जातियों (एससी) की मेरिट 242 गई है वहीं पर सामान्य वर्ग के अभियर्थियों को केवल 220 अंक पर ही पास कर दिया गया है। इसकी परीक्षा इसी साल छह सितंबर को हुई थी।

अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की नियमावली के मुताबिक, आरक्षण के नियमों का पालन किया जाना चाहिए था, लेकिन यहां पर सामान्य वर्ग, पिछड़ी जातियों और अनुसूचित जातियों के लिए कायदे-कानून को ताक पर रख दिया गया। इसकी वजह से सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों का चयन सबसे कम अंक पर हो गया। सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों की मेरिट भी सामान्य वर्ग से ऊपर है। इस तरह की नियुक्ती यदि यूपी सरकार करती है तो न केवल मामले कोर्ट में लटक जाएगा, बल्कि अभ्यर्थियों के कैरियर से खिलवाड़ होगा। यूपी सरकार की इस माममानी को लेकर अभ्यर्थियों में रोष है।uuu

अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि यूपी में नौकरी देने की सपा सरकार की नियमावली हर बार कैसे बदल जाती है। सरकार को तय करना होगा कि वह ऐसी गड़बड़ी कैसे कर रही है। सवाल आयोग के अध्यक्ष राज किशोर यादव को लेकर भी उठ रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि राज किशोर यादव केवल सरकार के लिए रबर स्टैप बनकर रह गए हैं। चयन न होने वाले अभ्यर्थियों का कहना है कि मामले को कोर्ट में लेकर जाएंगे। अभ्यर्थी यदि मामले को कोर्ट लेकर जाते हैं पूरी परीक्षा की फिर से मेरिट बनाई जा सकती है।

क्या है ताजा मामला

यूपी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा परिवहन विभाग में परिचालकों की 1690 पदों पर भर्ती का परिणाम घोषित किया गया, जिसमें सामान्य वर्ग की कटऑफ मेरिट 220 है, जबकि SC की 242 और OBC की 246 है।

एससी और ओबीसी की कटऑफ मेरिट इसलिए अधिक गई है। क्योंकि सामान्य वर्ग के लिए 50% आरक्षण गैरकानूनी तरीके से दिया गया है, जबकि OBC के लिए 27 और SC के लिए 22 फीसदी सीटें ही दी गईं हैं। जो अभ्यर्थी सामान्य वर्ग में क्वालीफाई किए थे उन्हें भी उनकी कटेगरी में ही रखा गया है।

नियमावती के मुताबिक, OBC/SC का कोई अभ्यर्थी यदि सामान्य वर्ग की कटऑफ मेरिट के बराबर या उससे अधिक अंक पाता है, तो उसे अनारक्षित वर्ग में शामिल किया जाना चाहिए, लेकिन आरक्षण की गलत और मनमानी व्याख्य द्वारा अनारक्षित को सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया, जिसमें सामान्य वर्ग की मेरिट बहुत नीचे आ गई।

क्या है नियमावली

नियमावली के मुताबिक, सबसे पहले अनारक्षित की मेरिट तैयार की जानी चाहिए और उसमें आने वाले सभी आभ्यर्थियों की सूची बनाने के पश्चात् आरक्षित वर्ग की मेरिट बनाई जानी चाहिए।

यदि परीक्षाएं दो या त्री स्तरीय है तो हर स्तर पर पहले आरक्षित की मेरिट बनाई जानी चाहिए जिसमें किसी भी श्रेणी का उम्मदीवार आ सकें। उन परीक्षाओं में जहां चयन दो स्तरीय है, जैसे परीक्षा एंव साक्षात्कार । ऐसी चयन के दौरान परीक्षा में सबसे पहले जनरल की मेरिट तैयार की जाय और उसमें आने वाले ओबीसी और एससी को सामान्य वर्ग माना जाए। विशेष उन अभ्यर्थियों को जिन्होने किसी तरह का आरक्षण का लाभ न लिया है।

किसी भी ऐसे अभ्यर्थी को आरक्षित वर्ग की मेरिट सूची में जाने से नही रोका जाना चाहिए, यदि उसके प्राप्तांक सामान्य वर्ग की कटआफ से ऊपर है, भले ही वह अपने आवेदन में आरक्षण का दावा किया है।

ऐसे अभ्यर्थी जो आरक्षण के तहत उम्र सीमा में छूट का लाभ या अवसर सीमा (जहां लागू हो) का लाभ ले रहें हों, उन्हें आवश्यक रूप से आरक्षित श्रेणी में जाना चाहिए।

यूपी में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित परिचालकों की लिखित परीक्षा में अनारक्षित वर्ग की मेरिट 220 तक के ओबीसी/एससी उम्मीदवारों को क्वालीफाई कराकर उनका इण्टरव्यू कराया जाए।

क्या कहते हैं अभ्यर्थी

परिचालक परीक्षा में चयनित न होने वाले अभ्यर्थी वीरेंद्र का कहना है कि सरकार को पूरे मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। यह गड़बड़ी कहां से हो रही है इसका भी पता चलना चाहिए। अभ्यर्थी रीता चौधरी ने बताया कि सरकार यदि कोई कठोर कदम नहीं उठाती है तो आंदोलन करेंगे।