Wednesday, September 8, 2021

राज्यपाल से कैसे हो गई चूक, दागी को बनाया एमएलसी

SKM_0286खुद की कंपनी को दिलाना चाहते थे मधुकर जेटली मेट्रो के कामकाज का ठेका, केंद्रीय सतर्कता आयोग से भी करवाई थी शिकायत

लखनऊ (अखिलेश कृष्ण मोहन) ।। मधुकर जेटली को आनन-फानन में एमएलसी के लिए मनोनीत कर दिया गया, जबकि वह हाल ही में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को लेकर बर्खास्त किए गए थे। यह बर्खास्तगी कोई और नहीं, बल्कि सीएम ने खुद की थी। ऐसे में हर फाइल की महीनों रिसर्च करने वाले राज्यपाल ने जेटली की फाइल को एक ही घंटे में क्यों हरी झंडी दे दी। जहां राज्यपाल कश्यप समेत कई नेताओं की फाइल राज्यपाल के यहां विवादित होने के तर्क को लेकर लटकी हुई हैं, वहीं छह महीने पहले बर्खास्त सपा नेता जेटली कैसे राज्यपाल की नजरों से बच गए यह जांच का विषय है।

गौरतलब है कि हाल ही में मेट्रो मैन की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने उन्हें प्रमुख सलाहकार मेट्रो रेल के साथ ही वाह्य सहायतित परियोजना व एनआरआई के सलाहकार पद से बर्खास्त कर दिया था। बताया जाता है कि मेट्रो मैन ई. श्रीधरन की नाराजगी की वजह से ऐसा किया गया था। उस समय यह भी आरोप लगाया गया था कि जेटली लखनऊ मेट्रो के लिए 1100 करोड़ रुपए के रोलिंग स्टॉक व सिग्नलिंग का काम अपनी चहेती कंपनी को दिलाना चाहते थे, लेकिन गुणवत्ता और कई अन्य कारणों की वजह से मेट्रो मैन ने इसकी अनुमति नहीं दी थी।

सूत्र यह भी बताते हैं कि जब जेटली इसमें सफल नहीं हो पाए, तो जिस कंपनी को एलएमआरसी ने इसका ठेका दिया, उसके खिलाफ दुष्प्रचार में जुट गए। ठेके को लेकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी लगाई गई थी। यही नहीं, इसकी शिकायत केंद्रीय सतर्कता आयोग से भी की गई। तब आयोग ने इसकी जांच कराने के लिए पत्र लिखा। इस वाकए से श्रीधरन बेहद नाराज थे और उन्होंने मुख्यमंत्री से इसकी शिकायत की थी। यानी जेटली सीएम के मेट्रो प्रोजेक्ट को ही लटकाना चाहते थे।

जोड़तोड़ में माहिर जेटली को अब एमएलसी मनोनीत कर दिया गया, लेकिन यह सवाल तो हमेशा उठता ही रहेगा कि आखिर सीएम एक दागी नेता को एमएलसी बनाने पर मजबूर क्यों हो गए और राज्यपाल ने एक दागी को एमएलसी क्यों बनाया। क्या नेता जी या परिवार के किसी अन्य सदस्य के सहयोग से जेटली ने मुख्यमंत्री पर दबाव बनवाया। इसके बाद जेटली का नाम एमएलसी की सूची में भेजा गया। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि एमएलसी बनाने को लेकर महीनों रिसर्च करने वाले राज्यपाल राम नाईक से यह चूक किसने करवाई।

फाइल फोटोः मधुकर जेटली।