Wednesday, September 8, 2021

हाईकोर्ट की कुलपति को फटकार, दलित छात्रों को एडमिशन दें, भविष्य बर्बाद न करें

लखनऊ. हाईकोर्ट ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के दलित मेधावी छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को संज्ञान लेते हुए फटकार लगाई है। बीबीएयू प्रशासन ने मनमानी करते हुए एमफिल प्रवेश परीक्षा में सर्वोच्च अंक पाने वाले बसन्त कनौजिया सहित अन्य दो छात्र अश्वनी रंजन व जयवीर को एडमिशन देने से मना कर दिया था। इसे हाईकोर्ट ने बहुत गलत हरकत माना है। – DAINIKDUNIA.COM

 

क्या था यूनिवर्सिटी का तर्क

विश्वविद्यालय का तर्क था कि उक्त छात्र फेसबुक पर शिक्षकों के खिलाफ टिप्पणियां करते हैं, जबकि पीड़ित छात्रों का कहना है कि बीबीएयू प्रशासन उनकी बातें नहीं सुनता है। उनकी मांग को हमेशा अनसुना कर उनके साथ जातिगत व्यवहार किया जाता है। उनके ऊपर झूठी FIR दर्ज करवाकर, उनकी आवाज दबाने का कार्य करते हैं। ऐसे में आवाज उठाना कहां गलत हो सकता है।

 

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गौरतलब है कि उक्त छात्र बीबीएयू में व्याप्त अराजकता और भ्रष्टाचार को लगातार उजागर कर रहे थे। इसलिए प्रशासन इन छात्रों को यूनिवर्सिटी में एडमिशन नहीं देना चाहता था। इस वजह से पीड़ित छात्रों ने एडमिशन के लिए उच्च न्यायालय से गुहार लगाई थी।

 

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इस तरह हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

 

हाईकोर्ट के आदेश पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बसन्त कनौजिया को एडमिशन दे दिया था, लेकिन दो अन्य छात्रों को लगातार दौड़ाते रहे। यूनिवर्सिटी ने दोनों छात्रों को एडमिशन नहीं दिया। तब छात्रों ने मानसिक रूप से परेशान होकर दोबारा उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना पर फिर से उच्च न्यायालय में एडमिशन न देने पर गुहार लगाई थी।

छात्रों की गुहार पर हाईकोर्ट ने आदेश की अवहेलना को लेकर कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट जारी कर दिया। जिस पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने दोबारा छात्रों को एडमिशन ने देने के लिए उच्च न्यायालय की द्वितीय बेंच में अपील दायर कर दी।

हाईकोर्ट

16 नवंबर यानी आज मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय की सेकंड बेंच ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ ने रिट नंबर 22499, बसन्त कनौजिया बनाम यूनियन ऑफ इंडिया पर बीबीएयू प्रशासन को लताड़ लगाई। बीबीएयू ने प्रदेश सरकार के छात्रों को एडमिशन न देने के लिए एक बड़े वकील को हायर किया था।

आज हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने बीबीएयू प्रशासन से सीधा सवाल किया कि क्या ये छात्र कोई आतंकवादी या नक्सली हैं जिस वजह से बीबीएयू एडमिशन नही दे रहा है। तब बीबीएयू के वकील ने तर्क दिया कि उक्त छात्र फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं।

 

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कोर्ट के सख्त होने के बाद मिला एडमिशन

 

इस पर न्यायाधीश ने सख्त होते हुए कहा कि छात्रों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी बीबीएयू की होती है न कि कोर्ट। आप छात्रों को नियंत्रित अपने नियम से करिये। छात्रों का इतना बड़ा गुनाह नही कि उन्हें एडमिशन न दिया जाए।

माननीय उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि बीबीएयू प्रशासन तुरंत एडमिशन दे तथा बीबीएयू प्रशासन के जिन अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश की अवहेलना की उनको आगामी आने वाली तारीख पर सजा सुनाई जाएगी।

उच्च न्यायालय ने सख्त लहजे में बीबीएयू प्रशासन द्वारा डाली गई छात्रों को एडमिशन न देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।

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