Tuesday, September 7, 2021

सरकारी बैंक ने 85 रुपए खर्च कर 1 रुपये वसूलने के लिए भेज दिया नोटिस !

New Delhi. देश के सरकारी क्षेत्र के आईडीबीआई बैंक का बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बैंक ने 85 रुपये खर्च कर कुरियर के माध्यम से ग्राहक को 1 रुपये की वसूली का नोटिस भेजा है। बैंक ने इसका भुगतान आरटीजीएस, एनईएफटी या चेक से करने को कहा है।

आईडीबीआई बैंक

गाजियाबाद के एक ग्राहक नोटिस मिलने के बाद उसने अपना नाम उजागर न करने की शर्त पर ये चिट्ठी दिखाई है, जो गत 5 अक्तूबर को बैंक की तरफ से भेजी गई है। चिट्ठी में लिखा है, 1 अक्तूबर 2018 को आपके लोन अकाउंट के सब अकाउंट में 1 रुपये बकाया है, इसका भुगतान आरटीजीएस, एनईएफटी या चेक के जरिये किया जा सकता है। भुगतान न होने की दशा में ये अकाउंट ओवरड्यू स्थिति में रहेगा। ऐसे में जल्द इसका भुगतान करें। ग्राहक ने बताया कि ये उसका लोन अकाउंट है जिसकी हर महीने किस्त जा रही है। ऐसे में उसे ये भी समझ नहीं आ रहा है कि ये रकम कैसे नहीं जा सकी।

उसने सवाल भी उठाया कि अगर बकाया रह भी गया तो बैंक अगली किस्त में जोड़कर उसकी वसूली कर सकता है, इस तरह नोटिस भेजने का क्या औचित्य है?

इस हास्यास्पद स्थिति के बाद ग्राहक इस बात से भी परेशान है कि इस रकम के भुगतान में उसे रकम से कई गुना ज्यादा खर्च करना पड़ेगा।

कर्ज ज्यादा भेजने में होगा खर्च

ग्राहक का कहना है कि अगर बैंक को वसूली की रकम कुरियर के जरिये भेजूं तो लोकल कुरियर का खर्चा कम से कम 85 रुपये होता है। अगर साधारण डाक से भेजूं तो भी 5 रुपये देने होंगे।
इसी तरह स्पीड पोस्ट से भेजने का खर्चा भी कम से कम 15 रुपये आता है और जीएसटी अलग। इतना ही नहीं अगर आरटीजीएस और एनईएफटी किया जाए तो उस पर भी 2.5 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन का खर्चा आएगा। इसके अलावा अगर ग्राहक चेक से भी भुगतान करता है तो 1 चेक को छापने और पहुंचाने का खर्च 10 रुपये से ज्यादा होता है।

किंगफिशर से नहीं वसूल सके 900 करोड़
आईडीबीआई बैंक विजय माल्या की कंपनी किंगफिशर से करीब 900 करोड़ की वसूली नहीं कर सका है। सवाल है कि क्या वो 1-1 रुपये वसूल कर उसकी भरपाई करना चाहता है?

बैंक की मजबूरी है

रिजर्व बैंक के पूर्व निदेशक विपिन मलिक ने कहा वैसे तो ये प्रक्रिया बिल्कुल भी व्यवहारिक नहीं है लेकिन बैंक की ये मजबूरी होती है कि वो किसी भी अकाउंट या उसके सब अकाउंट में कोई भी रकम बकाया न छोड़े। जब तक पूरी रकम वसूल न हो जाए वो अकाउंट बैंक के ऊपर भार रहता है। ऐसे में सरकार को ऐसा विकल्प देना चाहिए कि 100 रुपये से कम के बकाया बैंक के अधिकार क्षेत्र में रहे और वह उसे खत्म कर सके।