Sunday, September 5, 2021

हिन्दू वोटों के ध्रवीकरण के लिए JNU मामले को बढ़ा रही केंद्र सरकार!

jnu-protests_650x400_81455647379जेएनयू परिसर में नारा लगाने वाले पांच आरोपियों के देखे जाने की खबर से हड़कंप

आरोपी उमर खालिद के परिवार ने कहा माहौल ठीक होने पर कर सकता है सरेंडर

गृह मंत्री भी पाक आतंकी हाफिज सईद का हाथ होने जैसा बयान देने के बाद हो रही किरकिरी से हैं मौन

लखनऊ (अखिलेश कृष्ण मोहन)।। जेएनयू मामले में करीब 10 दिन बाद भी जांच एजेंसियां पहले वाली जगह पर ही खड़ी हैं। वह न तो कन्हैंया को रिहा कर पा रही हैं और न ही उमर खालिद को गिरफ्तार। इसको लेकर जेएनयू के एक वरिष्ठ प्रोफेसर का कहना है कि केंद्र की भाजपा सरकार मामले को हल करना नहीं चाहती। वह इसे आगे बढ़ा कर हिन्दू वोटों का ध्रुवीकरण कर रही है, जिससे पूरे देश में हिन्दू के नाम पर लोगों को एक कर वोट लिया जा सके। केंद्र सरकार यदि चाहती, तो पूरा मामला चार दिन में दूध का दूध पानी का पानी हो सकता था।

उधर, जेएनयू के उन पांच छात्रों को रविवार देर रात यूनिवर्सिटी कैंपस में देखा गया, जिन पर देशद्रोह के आरोप हैं। इन छात्रों पर संसद हमले के दोषी अफजल गुरु के समर्थन में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत विरोधी नारे लगाने के आरोप हैं। इस मामले के छह मुख्य आरोपियों में से ये पांचों गायब थे। जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया और वह फिलहाल जेल में है।

आइसा समर्थित छात्र ने बताया कि आइसा के पदाधिकारी आशुतोष, अनंत प्रकाश और छात्रसंघ के वर्तमान सचिव रामा नागा तथा डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़े उमर खालिद और अनिर्बान भी कैंपस में दिखे हैं। आइसा के एक अन्य सदस्य का कहना है कि ये छात्र लगातार मीडिया ट्रायल और हमले के डर से कैंपस में आए हैं। छात्र उमर खालिद के परिवार ने कहा है कि माहौल ठीक रहने पड़ वह सरेंडर कर सकता है। पुलिस ने इन छात्रों की तलाश में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में दबिश दी है।

कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी और उसकी पेशी के दौरान दो बार कोर्ट में वकीलों द्वारा मारपीट किए जाने के बाद पूरे देश में तीखी बहस छिड़ी हुई है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार देशद्रोह के कानून का सहारा लेकर विरोध में उठने वाली आवाजों को कुचलना चाहती है।

फोटोः जेएनयू परिसर।