Saturday, September 4, 2021

जेएनयू प्रकरण के बाद होता बिहार चुनाव तो भाजपा को मिलती 5 सीटें

o-JNU-facebookरोहित बेमुला और जेएनयू मामलों से भाजपा का गिरा ग्राफ

आरएसएस और एबीवीपी ने भी करवाई भाजपा की फजीहत

लखनऊ (अखिलेश कृष्ण मोहन)।। एबीवीपी और आरएसएस की वजह से भाजपा को पिछले तीन महीनों से लगातार नुकसान हो रहा है। बिहार चुनाव के समय आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण के बयान से तो भाजपा बिहार का चुनाव ही हार गई, वहीं रही सही कसर एबीवीपी के छात्र नेता पूरी करते रहे हैं। रोहित बेमुला और जेएनयू प्रकरण ने भाजपा को बैकफुट पर खड़ा कर दिया है। दैनिक दुनिया डॉट कॉम के एक सर्वे के मुताबिक, यदि जेएनयू प्रकरण के बाद बिहार में चुनाव होते तो भाजपा को पांच सीटें जीतने में भी लोहे के चने चबाने पड़ते।

गौरतलब है कि बिहार में केंद्रीय मंत्रियों की पूरी फौज और प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खुद मोर्चा संभालने के बाद भी भाजपा 53 सीट से आगे नहीं बढ़ पाई। यही नहीं उसके सहोयगी दल तो और भी फिसड्डी निकले। रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी दो, उपेन्द्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी दो और जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा बस एक पर सिमट कर रह गए।

तमाम एक्जिट पोल को धाता बताते हुए महागठबंधन ने जिस तरीके से भाजपा गठबंधन को पटखनी दी थी, यदि इस समय चुनाव होता तो महागठबंधन को 50 सीटें और मिलती, यही नहीं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम माझी को भी चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ता।

फोटोः जेएनयू में प्रदर्शन करते हुए छात्र।