Friday, August 27, 2021

दो फाड़ हो सकती है बसपा, जानिए कौन है इसके पीछे

BRIJESH PATHAKसतीश चंद्र मिश्रा और ब्रजेश पाठक की वजह से मच रही है भगदड़, पार्टी से निकाले गए और छोड़कर गए लोग बना सकते हैं नई पार्टी

लखनऊ ।। बहुजन समाज पार्टी में पिछले तीन साल से निकाले जानेवाले नेताओं और छोड़कर गए नेताओं की वजह भगदड़ जैसी स्थित बनी हुई थी, लेकिन इसका सिलसिला अब और तेज होता दिख रहा है। बहुजन समाज पार्टी के सेनापति रहे स्वामी प्रसाद मौर्य के पार्टी छोड़ने के बाद से हड़कंप है। नेता और विधायक अपने भविष्य को लेकर मंगलवार को देर रात तक स्वामी प्रसाद मौर्य के घर पर मौजूद रहे और चर्चा करते रहे। नेताओं को समझ में यह नहीं आ रहा है कि यदि स्वामी प्रसाद मौर्य को इस तरह से पार्टी छोड़ने को मजबूर किया जा रहा है, तो पार्टी के छोटे नेताओं का क्या होगा।

स्वामी प्रसाद मौर्य के विधानसभा के नेता विपक्ष रहते हुए पार्टी को इस तरह से छोड़ना कई सवाल खड़ा करता है। नेता विपक्ष का पद कैबिनेट मंत्री का होता है। ऐसे में स्वामी प्रसाद मौर्य कैबिनेट मंत्री बनने के लिए यह पद नहीं छोड़ सकते। ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसी क्या नौबत आ गई कि स्वामी प्रसाद मौर्य को खुद ही अपने बॉस मायावती को राजनीति से बर्खास्त करना पड़ा। ऐसा इस लिए है, क्यों कि मायावती ने खुद स्वामी को नहीं निकाला है, बल्कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने खुद ही पार्टी को आईना दिखाया है।

सूत्र बताते हैं कि स्वामी प्रसाद मौर्य के बढ़ते कद को लेकर सतीश चंद्र मिश्र और ब्रजेश पाठक खुश नहीं थे। यही नहीं पिछले छह महीनों से स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ मायावती को सलाह देने का काम भी ये नेता कर रहे थे। यही वजह रही कि स्वामी प्रसाद मौर्य को प्रेस कांफ्रेंस में बुलाया भी नहीं जा रहा था। स्वामी के न बुलाए जाने को लेकर दैनिक दुनिया डॉट कॉम ने पहले ही खुलासा कर दिया था। इसे पढ़ने के नीचे के लिंक पर क्लिक करिए।

माया की प्रेस कांफ्रेंस में क्यों नहीं आते स्वामी-सिद्दीकी-राजभर

 

स्वामी के जाने के बाद अब सवाल उठता है कि इसके बाद किसका नंबर है। बसपा के एक विधायक नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि पार्टी अब मजधार में फंस रही है। स्वामी के जाने के बाद पार्टी में विश्वास की कमी नजर आ रही है। कोई भी नेता सतीश चंद्र मिश्र और ब्रजेश पाठक के सामने खड़ा होने की हैसियत में नहीं है। स्वामी ही पिछड़ों और दलित विधायकों की बात को मायावती तक पहुंचाते थे।

फोटोः फाइल।