Sunday, August 29, 2021

माया की प्रेस कांफ्रेंस में क्यों नहीं आते स्वामी-सिद्दीकी-राजभर

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अखिलेश कृष्ण मोहन
अखिलेश कृष्ण मोहन

लखनऊ ।। सामाजिक व्यवस्था को ठीक करने का दम भरने वाली मायावती की प्रेस कांफ्रेंस में भले ही पत्रकार सवाल नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन पत्रकारों के दिमाग में कई सवाल उठ जरूर रहे हैं। मसलन वह दलितों और पिछड़ों की बात करती हैं। हर प्रेस कांफ्रेंस में दलित और पिछड़े ही उनके एजेंडे में होते हैं, लेकिन हकीकत की धज्जियां यहीं पर उड़ जाती हैं, जब देखा जाता है कि वहां पर केवल सतीश चंद्र मिश्रा और ब्रजेश पाठक ही सर्वेसर्वा होते हैं।

गौरतलब है कि मायावती की प्रेस कांफ्रेंस में यूपी विधान मंडल दल के दोनों ही नेता दिखाई नहीं देते हैं। अब उन्हें बुलाया नहीं जाता है, यही इसकी वजह हो सकती है, क्योंकि यदि बुलाया जाता को ऐसा नहीं हो सकता कि वह प्रेस में न आते। नसीमुद्दीन सिद्दीकी मुसलिमों के कद्दावर नेता माने जाते हैं, वहीं स्वामी प्रसाद मौर्या की दलित और पिछड़े वर्ग में गहरी पैठ है। वह पत्रकारों के बीच भी अच्छी पकड़ रखते हैं। इसके बाद भी उन्हें मायावती ने हाशिए पर रखा है। जबकि ब्रजेश पाठक और सतीश चंद्र मिश्र से मीडिया का कोई लेना देना नहीं होता है। उनकी बाइट भी टीवी चैनलों और अखबारों का हिस्सा नहीं होती है। इसके बाद भी ये दोनों चेहरे ही मायावती की हर प्रेस कांफ्रेंस में दिखाई देते हैं। पत्रकार उनके पास ही हा में हा मिलने के लिए पहुंचते रहते हैं। जबकि स्वामी प्रसाद मौर्या और नसीमुद्दीन सिद्दीकी कहीं भी नजर नहीं आते हैं। यही नहीं बसपा मिशन 2017 में सरकार बनाने का दम भर रही है, लेकिन पार्टी के ही उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष राम अचल राजभर को भी अब नहीं बुलाया जा रहा है। पिछले करीब एक दर्जन प्रेस कांफ्रेंस में ये तीनों ही नेता नहीं दिखाई दिए हैं।

सतीश चंद्र मिश्रा और ब्रजेश पाठक वहां पर कौन-कौन गुल खिलाते हैं, उसे समझना मुश्किल नहीं है। केवल आप उन्हें आधे घंटे तक वॉच कर लीजिए, आपको पता चल जाएगा कि वह किसको मजबूत करते हैं। बहुजन समाज पार्टी का एजेंडा क्या है? यह मायावती जरूर बता सकती हैं, लेकिन हकीकत में हो क्या रहा है। इसे भी जानना जरूरी है।

फोटोः फाइल।