Saturday, August 28, 2021

मोदी सरकार ने भी माना, नोटबंदी-जीएसटी से हुआ आर्थिक नुकसान !

बिजनेस डेस्क. आर्थिक सुस्ती के अलग-अलग दावों के बीच सरकार ने माना है कि वित्त वर्ष 2016-17 में देश की विकास दर धीमी पड़ी है। भारत की जीडीपी 2015-16 में 8 प्रतिशत की विकास दर के मुकाबले 2016-17 में गिरकर 7.1 प्रतिशत पर पहुंच गई। यही नहीं, आर्थिक रफ्तार धीमी होने के कारण औद्योगिक क्षेत्र और सर्विस सेक्टर में भी तेजी नहीं आई। शुक्रवार को वित्त अरुण जेटली ने लोकसभा में यह बात कही।

अरुण जेटली

 

2016-17 की आर्थिक विकास दर में कमी आई

वित्त मंत्री के मुताबिक, 2016 में वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी रहने के साथ-साथ जीडीपी के मुकाबले तय निवेश में कमी, कॉर्पोरेट सेक्टर पर दबाव वाली बैलेंस शीट, इंडस्ट्री सेक्टर के क्रेडिट ग्रोथ में गिरावट और कई वित्तीय कारणों से 2016-17 की आर्थिक विकास दर में कमी आई।

 

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विकास दर धीमी पड़ना दर्शाता है कि इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर में कम वृद्धि हुई। किसी देश की आर्थिक प्रगति कई कारणों पर निर्भर करती है। इनमें संरचनात्मक, बाहरी, राजकोषीय और मौद्रिक कारक शामिल होते हैं।

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के हाल के आंकड़ों के मुताबिक, जीडीपी की वृद्धि दर 2014-15, 2015-16 तथा 2016-17 में क्रमश: 7.5 प्रतिशत, 8 प्रतिशत और 7.1 प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 2017-18 की पहली और दूसरी तिमाही में जीडीपी क्रमश: 5.7 प्रतिशत और 6.3 प्रतिशत की दर से बढ़ी।

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है

जेटली ने कहा, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की अनुमानित मंदी के बावजूद, भारत 2016 में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था रहा। यह 2017 में भी सबसे तेजी से बढ़ रही दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में व्यापक सुधार

उन्होंने कहा कि सरकार ने अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं, इनमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देना, परिवहन एवं ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ठोस उपाय करना, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में व्यापक सुधार करना और कपड़ा उद्योग को विशेष पैकेज देना शामिल है।

 

फोटो-फीचर