Sunday, September 5, 2021

आम आदमी को मीडिया से इस तरह दूर करना चाहती है मोदी सरकार

Narendra-Modi-reading-newspaperलखनऊ (अखिलेश कृष्ण मोहन)।। यदि आप पत्रकार बनना चाहते हैं या पत्र-पत्रिकाओं का कारोबार करना चाहते हैं , तो यह खबर आपकी आंखें खोल देगी। आम तौर पर पत्रकार बनने के लिए कोई तय शिक्षण संस्थानों का मानक नहीं है। यही नहीं, अखबार और पत्र-पत्रिकाओं के चलाने को लेकर संपादक और मालिक की शिक्षा का स्तर भी अभी तक तय नहीं है। यह सबकुछ उसी तरह से चल रहा है, जैसे कंपनी बनाने के लिए किसी आदमी की योग्यता और उसकी उस उद्योग में कबिलियत का कोई विशेष मापदंड नहीं है, लेकिन मोदी सरकार मीडिया संस्थान चलाने वालों के लिए नया नियम लाने जा रही है।

नए नियम के तहत मीडिया चलाने के लिए न केवल संस्थानों की मीडिया में डिग्री या डिप्लोमा होना जरूरी होगा, बल्कि इसके लिए टर्नओवर भी निर्धारित किया जाएगा। यानी आपको दिखाना होगा कि आप कितना बजट इसके लिए लगाना चाहते हैं, यह पैसा कहां से आएगा। कुल मिलाकर यह मीडिया का कॉर्पोरेटाइजेशन है। इसके बाद आम आदमी को उसी तरह से अखबार और पत्र-पत्रिकाओं के संचालन में बजट रोड़ा बनेगा, जिस तरह से टीवी चैनल और रेडियो चैनल आम आदमी की पहुंच से दूर हैं। यह केवल कारोबारी और उद्योग वाले ही कर सकते हैं। पत्रकार तो उनके उद्योग धंधे का मजदूर है।

नए नियम से जहां एक बार फिर से सामंती मीडिया का अधिपत्य होगा, वहीं पर यहां पर भी लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। जहां एक ओर वेबसाइट और सोशल मीडिया लोगों तक कम लागत में खबरों को पहुंचा रहा है, वहीं ऐसे जमाने में मोदी सरकार का यह रवैया बिलकुल विपरीत है। RNI अखबारों के पंजीकरण और उसके संचालन को लेकर शिक्षा का मापदंड तय कर सामंतवाद की ओर इसे ढकेलने का काम कर रहा है। इससे छोटे और मझोले अखबारों के ऊपर आफत आएगी और फंफूदी की तरह उग रहे मीडिया संस्थानों की चांदी होगी, जो लाखों रुपए लेकर दो कौड़ी का ज्ञान नहीं दे पाते हैं।

क्या किया जा सकता था

बेहतर होता कि इसको लेकर मोदी सरकार एक नई पॉलिसी लाती, जिसके तहत अखबार चलाने वालों को ऑनलाइन ही रजिस्ट्रेशन की सुविधा मिलती। महीनों डीएम कार्यालय में बाबुओं से लेकर दिल्ली आरएनआई दफ्तर में अधिकारियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। अखबार रजिस्ट्रेशन को लेकर यह तय किया जा सकता था कि जो लोग रजिस्ट्रेशन के बाद भी अखबार नहीं निकालते हैं, उनका रजिस्ट्रेशन एक साल में रद्द कर दिया जाए। योग्यता तो लेकर पत्रकारिता विधा ही जरूरी न कर किसी भी विधा में इंटर या ग्रेजुएशन की डिग्री को जरूरी किया जा सकता है। इससे आम जनता को भी फायदा होगा और वह अखबार और पत्र-पत्रिकाओं को निकालने में परेशानी से बच सकेगा।

फोटोः फाइल।