Monday, September 6, 2021

यूपी के इस मुस्लिम नेता ने कहा- अयोध्या में केवल राम मंदिर बनेगा

नई दिल्ली.  राम मंदिर को लेकर शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने चौकाने वाला बयान दिया है। वसीम रिजवी ने गुरुवार को सीएम योगी आद‍ित्यनाथ से मुलाकात की। 20 म‍िनट के मुलाकात के बाद र‍िजवी ने मीड‍िया से कहा, मैंने राम मंदिर बनाने को लेकर मुलाकात की है। जिस स्थान पर मंदिर है, वहां मंद‍िर ही बनेगा।-dainikdunia.com

राम मंदिर

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अयोध्या के मुसलमानों ने भी यही बात

मस्जिद किसी मंदिर को गिराकर नहीं बनाई जा सकती, इसलिए उसे अयोध्या से बाहर या दूर किसी मुस्लिम क्षेत्र में बनाने पर हमने बात की है। इसके ल‍िए मैं पक्षकारों से बात कर रहा हूं। अयोध्या के मुसलमानों ने भी यही बात कही है।

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मंदिर जहां है वहीं बनेगा

रिजवी ने कहा, मैं सभी पक्षकारों से बात कर रहा हूं। सभी ने करीब-करीब मंदिर पर सहमति दे दी है। कुछ मुद्दों पर बात होनी बाकी है। उनको भी पूरा कर लिया जाएगा। राम मंदिर पर कोई विवाद नहीं होगा। मंदिर जहां है वहीं बनेगा, किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। हम बात करके जल्द ही मुद्दे को सुलझा लेंगे।

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विवादित जमीन से कुछ दूरी पर बनेगी मस्जिद

मस्जिद अयोध्या से दूर बनाने पर बात हो रही है। ऐसी किसी जगह को तलाशा जाएगा, जो मुस्लिम बस्ती हो। मंदिर-मस्जिद मसले पर सीएम योगी से मुलाकात हुई है। हमारी बातचीत काफी सकारात्मक रही। इससे पहले वसीम र‍िजवी ने बातचीत में कहा था, “इस बातचीत के शांतिपूर्ण निपटारे का प्रस्ताव 6 दिसंबर तक तैयार कर उसे सुप्रीम कोर्ट में जमा कर देंगे। अयोध्या में विवादित जमीन से कुछ दूरी पर मुस्लिम बहुल इलाके में मस्जिद बनाई जा सकती है।

 

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रामलला की मूर्ति सामने आने के बाद विवाद शुरू

6 दिसंबर 1992 को ही बाबरी ढहाने की घटना हुई थी। इस वजह से यूपी शिया वक्फ बोर्ड ने शांतिपूर्ण निपटारे का प्रस्ताव 6 दिसंबर तक देने का फैसला किया है। बता दें, 1949 में विवादित ढांचे में रामलला की मूर्ति सामने आने के बाद विवाद शुरू हुआ। तब सरकार ने इस जगह को विवादित घोषित कर दिया और इस जगह ताला लगा दिया गया था।

सुब्रमण्यम स्वामी भी रास्ता सुझा चुके

शिया वक्फ बोर्ड अयोध्या मामले में रिस्पॉन्डेंट (प्रतिवादी) नंबर 24 है। बोर्ड ने पहली बार सुप्रीम कोर्ट में ही एफिडेविट दायर किया है। 68 साल पुराने इस मसले को सुलझाने के लिए शिया वक्फ बोर्ड के अलावा सुप्रीम कोर्ट, इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुब्रमण्यम स्वामी भी रास्ता सुझा चुके हैं।