Thursday, September 2, 2021

क्या विपक्ष के एजेंडे पर काम कर रहे हैं कुछ अधिकारी

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अखिलेश कृष्ण मोहन
अखिलेश कृष्ण मोहन

लखनऊ ।। मुख्यमंत्री की प्रदेश में अमन चैन बनाए रखने के लिए स्थानीय मामलों को फौरन निपटाने का फरमान भी हवा हवाई साबित हो रहा है। अधिकारी मामले को लेकर न तो गंभीर होते हैं और न ही उचित कार्रवाई करते हैं। इसी का नतीजा रहा कि गोरखपुर के एसएसपी को निलंबित करना पड़ा। लेकिन यह पहला मामला नहीं है। ऐसे दर्जनों मामले सपा कार्यालय और मुख्यमंत्री आवास पर आते हैं, जिसमें अधिकारी के संज्ञान न लेने का मामला होता है।

अधिकारियों की लापरवाही का ही मामला मथुरा और कैराना का मामला भी रहा है। सूत्रों की माने तो अधिकारी अब अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन न कर पार्टी बंदी ज्यादा करते हैं। वह भाजपा और अन्य विपक्षी पार्टियों के नेताओं से अपनी जुगलबंदी मजबूत करने के लिए उनके इशारों पर काम करते हैं। पिछले दिनों आईजी अमिताभ ठाकुर का मामला भी इससे प्रेरित बताया जा रहा है, लेकिन बाद में उस पार्टी ने जब अमिताभ के ऊपर हाथ रखने से मना कर दिया, तो वह जमीन पर आ गए।

समाजवादी पार्टी के एक बड़े नेता नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि मुख्यमंत्री की नौकरशाही ही उन्हें मात देने का काम कर रही है। वह नहीं चाहती कि सरकार की छवि अच्छी बने। यूपी के कई आईएएस और आईपीएस अधिकारी किसी दूसरी पार्टी के नेताओं के हाथ की कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं।

क्या है अधिकारियों की सुस्ती की वजह

एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी कहते हैं कि उनका अनुभव रहा है कि जब चुनाव होने को होते हैं तो सरकार के साथ कौन खड़ा है और विरोध में कौन है यह धीरे धीरे पता चलने लगता है। ऐसा ही कुछ इस सरकार के साथ भी हो रहा है। इसमें कुछ भी नया नहीं है।

फोटोः मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने जनता दरबार में लोगों से मिलते हुए।