Thursday, September 2, 2021

कौमी एकता दल के सपा में विलय का नहीं जारी हो पाया प्रेसनोट, मंत्री बर्खास्त

Mukhtar-ansari-580x395अफजल अंसारी ने कहा- वोटकटवा की भूमिका नहीं निभाना चाहती कौमी एकता दल, लेकिन सीएम की दिखने लगी है नाराजगी

लखनऊ ।। समाजवादी पार्टी में कौमी एकता दल के विलय को लेकर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव ने प्रेस कांफ्रेंस कर कौमी एकता दल के अध्यक्ष अफजल अंसारी का दर्जनों पदाधिकारियों के साथ पार्टी में विलय करवाया। इस विलय में सपा के दो विधायक मुख्तार अंसारी शामिल नहीं हैं। विधायक मुख्तार अंसारी जेल में बंद हैं। इस दौरान शिवपाल यादव ने यह भी कहा कि ये नेता अपने ही पुराने घर में लौट रहे हैं। इससे सपा को बहुत मजबूती मिलेगी।

कैबिनेट मंत्री बलराम यादव बर्खास्त

उधर, यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री बलराम यादव को बर्खास्त कर दिया गया है। उन्हें मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया है। बलराम की बर्खास्तगी को समाजवादी पार्टी में मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल के सपा में विलय को माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक खबर है कि बलराम यादव की कौमी एकता दल की सपा में मर्जर को लेकर अहम भूमिका थी।

सपा मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस के बाद भी देर रात तक सपा में मुख्तार अंसारी की पार्टी के विलय का प्रेस नोट जारी नहीं किया जा सका। पार्टी के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी सपा में शामिल नहीं हुए हैं। माना जा रहा है कि अखिलेश यादव इस विलय के पक्ष में नहीं थे। सपा कार्यालय में शिवपाल सिंह यादव ने कौमी एकता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अफजाल अंसारी को पार्टी की सदस्यता भी दिलाई। इस दौरान गाजीपुर के विधायक सिब्बुतुल्लाह अंसारी ने भी सपा की सदस्यता ली।

माना यह जा रहा है कि अखिलेश यादव इस विलय के पक्ष में नहीं थे। मंगलवार को उन्होंने जौनपुर में बयान दिया कि कार्यकर्ता मेहनत करें तो किसी के विलय की जरूरत नहीं होगी। विलय के बाद अफजाल अंसारी ने कहा कि वह साल 1994 में सपा का झंडा लेकर काम कर चुके हैं। कुछ परिस्थिति थी, जिसके वजह से कौमी एकता दल का गठन हुआ। अब विलय पर परिस्थिति यह है कि मोदी ने देश को गुमराह किया है। केंद्र की सत्ता हथियाने के बाद 2 साल से कुछ नहीं किया। केंद्र सरकार अपनी नाकामी को छिपाने के लिए सांप्रदायिक रणनीति का प्रचार कर माहौल बिगाड़ रही है। युवा सीएम के नेतृत्व में जो टीम काम कर रही है। वह प्रदेश को आगे ले जा रही है। कई पार्टियां चाहती थी कि कौमी एकता दल लड़े और पूर्वांचल में वोट कटे, लेकिन, उनका यह अभियान विफल रहा है। कौमी एकता दल वो कटवा की भूमिका नहीं निभाएगी।

मुख्तार के बड़े भाई हैं अफजाल

मऊ सदर से बाहुबली मुख्तार अंसारी साल 1996 में मऊ सीट से बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। साल 2002 और 2007 के विधानसभा चुनाव में भी निर्दलन प्रत्याशी के तौर पर जीत हासि‍ल की। साल 2012 के चुनाव के पूर्व मुख्तार ने कौमी एकता दल का गठन किया। कौमी एकता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्तार के बड़े भाई पूर्व सांसद अफजाल अंसारी हैं। कौमी एकता दल वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव और 2014 के लोकसभा चुनाव में कोई करिश्मा नहीं कर सकी। 2012 में केवल एक मऊ सीट पर मुख्तार जीतने में सफल रहे थे।

फोटोः प्रेस कांफ्रेंस में शिवपाल यादव और अफजल अंसारी।