Friday, September 3, 2021

क्या रामवृक्ष नक्सली था, अंबिका नहीं दे पाए जवाब

ambika-chaudharyमथुरा कांड में है नक्सलियों का हाथः अंबिका चौधरी

अखिलेश कृष्ण मोहन
अखिलेश कृष्ण मोहन

akhileshnews@gmail.com

लखनऊ ।। मथुरा कांड को लेकर यूपी सरकार ने कहा है कि इसमें नक्सलियों का हाथ था। इसे भांपने में एलआईयू फेल रहा है। इसलिए गृह मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। हालांकि अंबिका चौधरी इस सवाल का जवाब नहीं दे पाए कि यदि रामवृक्ष यादव के साथ वाले नक्सली थे, तो क्या वह भी नक्सली था।

प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी के साथ प्रेस कांफ्रेंस में आए विधान परिषद सदस्य ने कहा कि पूरे मामले को केंद्र सरकार तूल देना चाहती है, जबकि यह फेल्योर केंद्र की भाजपा सरकार का ही है। देश के गृहमंत्री के पास होता है इंटेलीजेंस विभाग, उन्हें इसकी सूचना सबसे पहले मिलनी चाहिए थी।

अंबिका चौधरी ने आगे कहा कि 29 मौतें अब तक हुई हैं। इसमें दो जाबांज पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं, लेकिन इस हमले में पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और अन्य राज्यों से आए नक्सलियों का हाथ था। हालांकि राम वृक्ष यादव नक्सली था या नहीं, इस सवाल का जवाब अंबिका चौधरी नहीं दे पाए। अंबिका चौधरी ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह के परिवार का इसमें हाथ होने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इसमें गृहमंत्री के परिवार के लोग शामिल हैं।

उधर, उच्चतम न्यायालय ने मथुरा के जवाहर बाग में हुई हिंसा की सीबीआई से जांच कराने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर सोमवार को तत्काल सुनवाई करने पर सहमति जता दी है। मथुरा के जवाहर बाग में हुई हिंसा में दो पुलिस कर्मियों सहित 29 लोगों की जान चली गई थी। न्यायमूर्ति पी सी घोष और न्यायमूर्ति अमिताव राय की एक अवकाश पीठ ने मामले को मंगलवार (7 जून) को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। अधिवक्ता कामिनी जायसवाल ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई का आग्रह किया था। याचिकाकर्ता वकील अश्विनी उपाध्याय के लिए पेश हुईं अधिवक्ता जायसवाल ने कहा कि घटना की शुरुआत से ही सबूत नष्ट किए जा रहे हैं और करीब 200 वाहन पहले ही जलाए जा चुके हैं।

तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि हिंसा की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच जरूरी है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने के लिए दो जून को पुलिस मथुरा के जवाहर बाग की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए पहुंची। समझा जाता है कि यह अतिक्रमण एक अल्पचर्चित संगठन आजाद भारत विधिक वैचारिक क्रांति सत्याग्रही के कार्यकर्ताओं ने किया था। पुलिस ने जब अवैध अतिक्रमणकारियों को खदेड़ने की कोशिश की तो हिंसा भड़क उठी। अतिक्रमणकारियों तथा पुलिस के बीच टकराव में एक पुलिस अधीक्षक और एक थाना प्रभारी सहित 29 लोगों की जान चली गई।

फोटोः प्रेस कांफ्रेंस में अंबिका चौधरी और राजेंद्र चौधरी।