Monday, September 6, 2021

फर्कः हरियाणा में यदि BJP की सरकार न होती तो क्या होता

FARKलखनऊ (अखिलेश कृष्ण मोहन) ।। जिन पत्रकारों को फर्क महसूस नहीं होता है, वह कान और आंख खोल लें। जेएनयू तो एक ट्रेलर था, अभी तो पूरी फिल्म ही बाकी है। जो कुछ हो रहा है, वह समाज में गैरबराबरी और विसंगतियों की वजह से हो रहा है। आप खुद ही देख सकते हैं। हरियाणा में आरक्षण की लपटों में कौन झुलस गया। रेप मर्डर और न जाने क्या-क्या हुआ। इसके बाद भी न तो सीएम खट्टर के ऊपर कोई आरोप है और न ही केंद्र सरकार को कोई परेशानी। क्या हुआ यह बताने की जरूरत नहीं है। यह तो खबरों में 10-20 फीसदी चल ही रहा है।

यूपी में इसका दूसरा चेहरा देख लीजिए। दंगा हुआ कई लोग मारे गए, टीवी चैनलों और अखबारों ने दंगे करवाए जाने की ऐसी रिपोर्ट दिखा दी, जिसकी वजह से सरकार के बर्खास्त करने की मांग एक साल तक होती रही। दंगे को लेकर पूरे प्रदेश में हिन्दू मुसलिम को बांटने वाला माहौल बना। बाद में मामले को लेकर विधानसभा की सर्वदलीय कमेटी ने जांच की, तो दंगा करवाने का वीडियो ही फर्जी पाया गया। अब पत्रकार विधानसभा में पेश होने से बच रहे हैं। उन्हें बदनामी नजर आ रही है। भाजपा दंगों को लेकर फर्जी वीडियो दिखाने वाले चैनलों पर कार्रवाई करने से बचाने के लिए सदन का ही बहिष्कार कर रही है। भाजपा की मंशा है कि आज तक के पत्रकारों को सदन में पेश न किया जाए।

जेएनयू में जो हुआ वह गलत हो सकता है, लेकिन यह लोगों के असंतोष और आक्रोश का नतीजा है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। आज देश में प्रदेश में माहौल खराब करने की साजिश की जा रही है, तो देश प्रदेश के अंदर ही शिक्षण संस्थान भी हैं। ऐसे में कैसे कहा जा सकता है कि वहां का माहौल खराब नहीं होगा। हरियाणा में यदि जाट आंदोलन को सरकार रोकने में नाकाम रही, तो इसमें खामी किसकी है। वहां रेप और मर्डर हुए, लोगों की गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। इस फर्क को समझना होगा।

फोटोः फाइल।