Saturday, August 28, 2021

PK को सपा के AY देंगे टक्कर, IT सेल होगी मजबूत

ABHINAV-YADAV

अखिलेश कृष्ण मोहन
अखिलेश कृष्ण मोहन

लखनऊ ।। समाजवादी पार्टी आईटी सेल को मजबूत करने में जुट गई है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर पार्टी के फ्रंटल संगठनों के तेज तर्रार और कंटेंट पर पकड़ रखने वाले पदाधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी दी जा रही है। रविवार को इलाहाबाद के एमटेक छात्र अभिनव यादव (एवाई) को आईटी सेल में अहम जिम्मेदारी देते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर छात्र सभा के यूपी अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ‘देव’ ने उन्हें समाजवादी पार्टी छात्र सभा का प्रदेश सचिव भी मनोनीत किया है। अभिनव यादव ने दैनिक दुनिया डॉटकाम से कहा है कि प्रशांत किशोर (पीके) की भ्रम करने वाली ख़बरों को सपा की आईटी सेल बेनकाब करेगी और यूपी विधानसभा चुनाव में रणनीति के साथ सपा सरकार की योजनाओं को मुद्दा बनाया जाएगा। 

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी का आईटी सेल काफी दिनों से काम कर रहा है, लेकिन यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री की मंशा है कि इसे और धार देने और इसमें टेक्निकली अनुभवी लोगों को जोड़ने की जरूरत है। इसी क्रम में अब एमटेक और अनुभवी अभिनव यादव को बड़ी जिम्मेदारी देने का काम शुरू हो गया है।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी हाल के दो सालों में कई मामलों को सोशल मीडिया के माध्यम से ही संज्ञान लिया है और कार्रवाई भी हुई है। ऐसे में लोगों का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री का आईटी सेल मजबूत हुआ, तो कई जानकारियां उनको आईटी सेल के माध्यम से ही हो जाएंगी और सही समय पर उचित कार्रवाई भी हो सकेगी। इसका पार्टी और सरकार दोनों को फायदा होगा।

पीएम मोदी के नारे को आयोग में दी थी चुनौती

सामाजिक न्याय के लिए लड़ने वाले जुझारू और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट अभिनव यादव (एवाई) ने लोकसभा चुनाव के दौरान ‘अबकी बार मोदी सरकार’ के नारे को लेकर सपा की ओर से चुनाव आयोग में चुनौती दी थी। उनका कहना था कि जाति विशेष को लेकर यह प्रचार किया जा रहा है। यह आचार संहिता का उल्लंघन है, क्योंकि मोदी एक जाति है। अभिनव बताते हैं कि चुनाव आचार संहिता में साफ तौर पर कहा गया है कि किसी जाति या धर्म के नाम से कोई भी दल व प्रत्याशी प्रचार नहीं करेंगे। जाति के नाम पर वोट मांगना गैरकानूनी भी है। इन पोस्टरों में नरेंद्र मोदी की जगह सिर्फ मोदी ही लिखा हुआ है। उत्तर प्रदेश, गुजरात व मध्य प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में मोदी जाति के लोग रहते हैं। इसलिए कोई भी पार्टी किसी जाति के नाम पर प्रचार नहीं कर सकती।

अभिनव ने अपनी शिकायत में कहा था कि यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 का भी उल्लंघन है। इस धारा का उल्लंघन करने पर जेल व जुर्माने का भी प्रावधान है। कार्रवाई नहीं हुई तो इसकी नजीर देकर अन्य दलों के नेता भी अपने जाति के आधार पर पोस्टर लगवाने लगेंगे। इससे स्थिति काफी अराजक हो सकती है। अभिनव ने दलील दी थी कि 11 जुलाई 2013 को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने जातिवादी रैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसलिए इसकी जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। निर्वाचन आयोग ने इसको लेकर दलील दी थी कि अब चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे में इसे रोकना काफी मुश्किल है।

सोशल मीडिया की कई खबरों पर सीएम ने की है कार्रवाई

1- बरेली की महिला सीमा चौरसिया ने अपने फेसबुक पर सीएम अखिलेश यादव से गुहार लगाई थी कि उसके दो साल के मासूम बच्चे को बचाने में उसकी मदद करें। महिला ने एक लेटर लिखकर उसका फोटो सीएम अखिलेश के फेसबुक पेज पर पोस्ट किया। इस लेटर में महिला ने गुजारिश की थी कि उसके बच्चे को ब्लड कैंसर है और वह उसका इलाज कराने में समर्थ नहीं है, जिस कारण उसकी मदद की जाए। (मुख्यमंत्री ने फौरन संज्ञान लिया)।

2- लखनऊ में टाइप राइटर के साथ सिपाही की बदसलूकी को मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर खबर मिलते ही कार्रवाई की।

3- सोशल मीडिया पर खबर लिखे जाने के बाद सीएम ने अपनी ही पार्टी के बुंदलखंड के एक बड़े नेता पर कार्रवाई की। (बताया जाता है कि नेता के निर्देश पर ही महिला आयोग की एक सदस्य को सरेआम पीटा गया था)।

4- खून से बुलंदशहर की दो बच्चियों ने चिट्ठी लिखी थी और सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। मुख्यमंत्री ने पूरे मामले का संज्ञान लिया और उनकी मदद की।

5- राज्यपाल राम नाईक भी सोशल मीडिया की खबरों पर मुख्यमंत्री की कार्रवाई की तारीफ कर चुके हैं।

फोटोः दाएं प्रशांत किशोर (पीके) और बाएं अभिनव यादव (एवाई)।