Saturday, September 4, 2021

राज्यसभा सदस्यता छिन जाने पर शरद यादव ने उठाया ये बड़ा कदम

बिहार। जेडीयू के बागी नेता शरद यादव राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित किए जाने के फैसले को अदालत में चुनौती देंगे। यादव ने कहा कि वह सदन और सभापति की संस्था का सम्मान करते हुए उनके फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा ‘सभापति का फैसला सर-माथे पर। -DAINIKDUNIA.COM

मैं इस फैसले के लिए मानसिक रूप से पहले ही तैयार था। अभी यह लड़ाई आगे जारी रहेगी। चुनाव आयोग के फैसले की तरह इस फैसले को भी कानून की अदालत में और जनता की सर्वोच्च अदालत में ले जाएंगे।’

 

भाजपा के खिलाफ एकजुट होने में समय लगेगा

उन्होंने कहा कि यह वास्तविक लड़ाई सिद्धांत की है। यादव सात बार लोकसभा के लिए और चार बार राज्यसभा चुने गए। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी नई स्वतंत्रता के लिए भाजपा और विपक्षी पार्टियों के खिलाफ एकजुट होने में समय लगेगा। यह लड़ाई अभी जारी रहेगी।

दोनों नेताओं की सदस्यता खत्म

दरअसल, शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता रद्द कर दी गई और इसकी जानकारी राज्यसभा सचिवालय ने सोमवार रात दी। नीतीश कुमार के गुट ने उपराष्ट्रपति से इन दोनों नेताओं की सदस्यता खत्म करने की अपील की थी।

सदस्यता रद्द होने पर अली अनवर ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी उस वक्त मिली जब वे राजकोट में एक मीटिंग में शामिल थे। उन्होंने कहा कि वे शरद यादव से बात करेंगे और फैसला साथ ही लिया जाएगा।

 

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नीतीश के फैसले का विरोध किया

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के इस फैसले से शरद यादव को तगड़ा झटका लगा है। शरद और अली अनवर ने बिहार में भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने के नीतीश के फैसले का विरोध किया था और पार्टी से बगावत कर दी थी। इसके बाद जदयू ने अगस्त में शरद को राज्यसभा में पार्टी नेता के पद से हटा दिया था।

चुनाव आयोग से भी शरद को झटका

नीतीश गुट ने राज्यसभा सचिवालय से शरद और अली अनवर की सदस्यता खत्म करने की अपील की थी। इस पर फैसला सुरक्षित था जो अब आया है। इससे पहले चुनाव आयोग से भी शरद को झटका लगा था। आयोग ने पार्टी के चुनाव चिन्ह तीर पर नीतीश गुट के दावे को सही ठहराया था।

 

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