Monday, August 30, 2021

हर पांचवां व्यक्ति हो रहा है आर्थराइटिस का मरीजः डा. शकील

अवाम वेलफेयर सोसाइटी ने संगोष्टी कर किया लोगों को जागरुक, प्रोजेक्टर पर प्रदर्शन कर दी गई बचने की सलाह

लखनऊ (अखिलेश कृष्ण मोहन) ।।dr shakil ahamad kidwaiर्थराइटिस रोग जिंदगी के सुकून को छीन लेता है। यह भले ही बुढ़ापे की बीमारी कहा जाता है, लेकिन अब जवानी में ही यह लोगों को जकड़ रहा है। वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. शकील अहमद किदवई की माने तो इसकी करीब 200 तरह की परेशानियां होती हैं। इसके किसी भी रूप में जोड़ों में सूजन दिखाई देने लगती है, लेकिन इससे घबड़ाने की जरूरत नहीं है केवल बचाव और उपचार से आर्थराइटिस से बचा और इसका इलाज किया जा सकता है।

इरा मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ डॉक्टर शकील अहमद किदवई ने ये जानकारियां अवाम वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित जागरुकता विषय पर संगोष्ठी के तहत प्रेस क्लब में दी है। उन्होंने कंप्यूटर पर वीडियो स्लाइट से प्रजेंटेशन देते हुए बताया कि किस तरह से आर्थराइटिस लोगों को चलने फिरने में परेशानी पैदा करता है और इसे दूर करने के लिए ऑपरेशन से कैसे दर्द से निजात पाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि एक सर्वे के अनुसार हर पांचवां व्यक्ति इस बीमारी का शिकार है। यह पांच तरीके का होता है, इसका इलाज और बचाव दोनों आसान है लेकिन सही समय पर होना चाहिए।

संगोष्ठी में मौजूद डा. अमित नंदन मिश्रा ने बताया कि आमतौर पर आर्थराइटिस के लिए मोटापे को दोषी माना जाता है, लेकिन इसके और भी कई कारण हैं। औरतों में एस्ट्रोजन की कमी और थायराइड का विकार भी इसका बड़ा कारण है। स्किन और ल्यूकीमिया के कारण भी यह बीमारी होती है। टायफाइड या पैराटायफाइड के बाद भी लोगों के जोड़ों में दर्द बना रहता है। जो लगातार बनी रहे तो ऑर्थराइटिस का रूप ले लेती है।

व्यायाम है इससे बचने का अच्छा तरीका

दुनिया भर में आर्थराइटिस के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से 12 अक्तूबर को विश्व आर्थराइटिस दिवस मनाया जाता है, क्योंकि अक्सर लोग जोड़ों के दर्द को थकान की देन समझ कर अनदेखा कर देते हैं, जबकि बाद में यह मुसीबत बन जाता है। शुरू में अगर घुटने के दर्द का इलाज कराया जाए तो समय रहते ऑस्टियोअर्थराइटिस ठीक भी हो सकता है, लेकिन देर होने पर बहुत मुश्किल होती है। डॉ. शकील अहमद किदवई ने बताया कि आर्थराइटिस से बचाव का सबसे अच्छा तरीका व्यायाम है। व्यायाम से जोड़ों की मांसपेशियां मजबूत रहती हैं, उनका लचीलापन बना रहता है और जोड़ों को उनसे ‘सपोर्ट’ भी मिलता है। मोटापा भी आर्थराइटिस का एक कारण है। इसलिए इसे रोकने के लिए संयंमित खानपान, शारीरिक सक्रियता, व्यायाम आदि पर ध्यान देना चाहिए। वजन कम होने से जोड़ों पर दबाव भी कम पड़ता है। इसके अलावा, विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में शरीर को मिलना चाहिए। व्यायाम करते समय ध्यान रखना चाहिए कि यह भी संतुलित हो। जरूरत से अधिक व्यायाम करने से जोड़ों पर फिर दबाव पड़ेगा और तकलीफ होगी तथा कार्टिलेज का क्षरण बढ़ेगा। व्यायाम हर दिन हो लेकिन संतुलित होना चाहिए।

फोटोः लखनऊ प्रेस क्लब में संगोष्ठी के दौरान वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. शकील अहमद किदवई (बाएं से दूसरे)