Wednesday, September 1, 2021

इमरजेंसी के दौरान अनंत कुमार ने इंदिरा सरकार के खिलाफ खोला था मोर्चा, ये है राजनीतिक सफर

New Delhi. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता और केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार का निधन हो गया। उन्होंने सोमवार (12 नवंबर) 1 बजकर 50 मिनट पर आखिरी सांस ली। अनंत फेंफड़े के कैंसर से जूझ रहे थे और आखिरकार मौत से ये जंग हार गए। बीजेपी के कद्दावर नेताओं में शुमार अनंत पहले ऐसे शख्स थे, जिन्होंने युनाइटेड नेशन्स में कन्नड़ में भाषण दिया था। इसके अलावा उन्हें बेंगलुरु का सबसे चहीता सांसद भी माना जाता रहा है।

22 जुलाई, 1959 को एक मध्यमवर्गीय परिवार में उनका जन्म हुआ था। उनके पिता नारायण शास्त्री रेलवे में कर्मचारी थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई मां गिरिजा एन शास्त्री की देखरेख में हुई, जो खुद भी ग्रैजुएट थीं। अनंत कुमार ने आर्ट्स और लॉ में ग्रैजुएशन किया और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर वो लोगों की नजर में आए। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद संघ परिवार का छात्र संगठन था।

राजनीतिक सफर

इमरजेंसी के समय अनंत कुमार ने इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तमाम छात्रों के साथ वो भी जेल गए थे। उन्हें तब करीब 30 दिन जेल में रहना पड़ा था। 1987 में वो भारतीय जनता पार्टी से जुड़े। कर्नाटक में बीजेपी के उदय में अनंत कुमार का बड़ा हाथ रहा है।

1998 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय वो सबसे कम उम्र में केंद्रीय मंत्री बने थे। अनंत कुमार सिविल एविएशन, टूरिज्म, स्पोर्ट्स, यूथ अफेयर एंड कल्चर, अर्बन डेवलपमेंट और पोवर्टी एलिविएशन मिनिस्टर थे। 1996, 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में बेंगलूरु साउथ से लगातार 6 बार जीत हासिल की। फिलहाल वो केंद्र सरकार में संसदीय कार्यमंत्री थे।

पर्सनल लाइफ

अनंत कुमार की पत्नी डॉ. तेजस्विनी हैं, जबकि उनकी दो बेटियां ऐश्वर्या और विजेता हैं। अनंत कुमार को फेफड़ों का कैंसर था उनका इलाज लंदन और न्यू यॉर्क में भी हुआ था।